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\"संत में समाज का चरित्र और आदर्श दिखता है\'

7 वर्ष पहले
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श्रावकसे श्रावक और संत से श्रावक तो मिलते ही रहते हैं। लेकिन वह दुर्लभ क्षण है, जब संतों से संतों का मिलन हो। मैं कह सकता हूं कि जब एक मंच पर दो संत बैठते हैं तो दो समाज एक फर्श पर बैठ जाते हैं। संतों की एकता से श्रावकों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। संत समाज का दर्पण होते हैं। संत में समाज का चरित्र, आदर्श व्यवहार दिखता है। संतों की वाणी से समाज को दिशा मिलती है। यह विचार राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर ने रविवार को जैन छात्रावास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस दौरान मुनिश्री आलोक कुमार ने कहा कि इंसान जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ कुछ चाहता ही रहता है। बचपन में खिलौने, जवानी में सांसारिक भोग, मान, सम्मान, धन-दौलत, औलाद और बुढ़ापे में भी चाह बनी रहती है। बस सुख ही सुख मिलता रहे। मैं कहता हूं अधिकांश दुख बाहर से नहीं भीतर की आकांक्षाओं से आता है। यही आकांक्षाएं दुख को जन्म देती हैं।

दिगंबर और श्वेताम्बर संतों ने एक मंच पर दिया एकता का संदेश

श्रमणसंस्कृति के दो विचार धाराओं के संत दिगंबर जैन संप्रदाय के राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर और श्वेताम्बर श्रमण संस्कृति के संत मुनिश्री आलोक कुमार मुनि हिम कुमार का मिलन रविवार को जैन छात्रावास में हुआ। संतों ने एकता और अखंडता का संदेश दिया। भगवान महावीर के चित्र का अनावरण अशोक जैन हेमंत जैन ने किया। दीप प्रज्वलन शांतिलाल सचेती, राजकुमार जैन धनेश जैन ने किया।

जैन छात्रावास में धर्मसभा के दौरान एक मंच पर बैठे दिगंबर और श्वेताम्बर संत।