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निर्यात मांग से चावल के भावों में रही मजबूती

7 वर्ष पहले
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आलोच्यसप्ताह चीका, सफीदों, कैथल, तरावड़ी, निसिंग, करनाल आदि मंडियों में 1121, डीबी एवं बासमती आदि बारीक किस्म के धान का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो जाने से अंदर का धान 400 से 500 रुपए उछलकर 4400 से 4500 रुपए की ऊंचाई पर जा पहुंचा। नरेला मंडी में जो 1121 धान नीलामी में 3700 से 3750 रुपए बिका था, उसके भाव 4150 रुपए पर जा पहुंचे। गौरतलब है कि सितम्बर शिपमेंट के लिए निर्यातकों को 11 हजार टन खरीद करना था, जबकि राइस मिलों में माल उपलब्ध होने से प्रतिस्पर्धात्मक लिवाली करनी पड़ी, जिससे 700 रुपए उछलकर 8200 से 8300 रुपए 1121 सेला चावल के भाव हो गए। सुगंधा एवं बासमती चावल में भी 300 से 400 रुपए की तेजी गई। इसके अलावा गेहूं सहित मक्की, बाजरा में 10 से 15 रुपए ऊपर-नीचे भाव होकर पूर्वस्तर पर सुस्त हो गए। दलहनों में उड़द नए माल की दहशत एवं मुम्बई में आयातकों की हर भाव में बिकवाली चलने से एक पखवाड़े के अंतराल 800 से 900 रुपए प्रति क्विंटल टूटकर एसक्यू 5950 रुपए यहां बन गया था, लेकिन गत एक सप्ताह के अंतराल 250 रुपए घटकर सप्ताहांत में फिर से बाजार पूर्वस्तर 6200 रुपए पर जा पहुंचे। तुअर दाल मिलों की मांग ठंडी पड़ जाने से 275 रुपए टूटकर 4825 रुपए नई लेमन रह गयी। बाद में इसमें 75 रुपए की मजबूती गई। तेल-तिलहन:आलोच्यसप्ताह सोयाबीन की आवक नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर एवं इंदौर लाइन में बढ़ जाने से 75 से 80 रुपए और टूटकर वहां इसके भाव 3300 से 3375 नमी के हिसाब से रह गए। वहीं फसल की कटाई जोरों से चलने एवं उत्पादन बढ़ने के अंदेशे से निर्यातक सोया डीओसी की लिवाली से पीछे हट गए, जिससे इसके भाव 700 से 800 रुपए और घटकर 30400 से 30600 रुपए प्रति टन रह गए। इसके प्रभाव से दिल्ली सहित एनसीआर की मंडियों में भी फार्मरों के लिए इसी अनुपात में घटाकर व्यापार हुआ। खाद्य तेलों में सरसों तेल पितृ विसर्जन के दिन बिहार, बंगाल, उड़ीसा एवं असम के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 प्रतिशत अधिक खपता है, उसकी लिवाली चलने से लोकल मांग कम के बावजूद 100 रुपए बढ़कर यहां टैंकर में 7200 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। सोया तेल मंडियों में कच्चे माल के दबाव से 50 रुपए घटकर 6250 रुपए रह गया। लेकिन अंतिम दिन पैकिंग निर्माताओं की मांग से 50 रुपए बढ़ गए।

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