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क्षमा दिलेरी के दीपक में दया की ज्योति है: जैन
ग्वालियर| क्षमामांगने से अहंकार गलता है और ढलता है तो क्षमा करने से सुसंस्कार पलता है और चलता है। क्षमाशीलता का शस्त्र और अहिंसक का अस्त्र है। क्षमा दिलेरी के दीपक में दया की ज्योति है। क्षमा अहिंसा की अंगूरी में मानवता का मोती है। वास्तव में धर्म अहिंसा की डोरी से गूंथा हुआ प्रेम का पालना है।
यह विचार जैन चिंतन प्रकोष्ठ की क्षमावाणी मिलन समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय अध्यक्ष सुनीता जैन ने व्यक्त किए। मुख्य वक्ता डॉ. वीणा जैन ने कहा कि क्षमा हमारा स्वाभाविक धर्म है। क्रोध तो विभाव है, उसे विभाव से बचाने के लिए स्वभाव की ओर रुचि जागृत करें। जो व्यक्ति प्रतिदिन अपने भीतर भाव जागृत करने का प्रयास करता है, उसी का जीवन अमृतमय है। रतन जैन ने भी संबोधित किया।