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प्रार्थना हृदय की पुकार: संतश्री

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर| हृदयकी पुकार प्रार्थना है। परमेश्वर की शरण में जाने के लिए जप, तप, ध्यान, साधना अनेक प्रकार की विधियां हैं। यह विचार संत गोपालराम महाराज ने गुरुवार को लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

संत गोपालराम ने कहा कि जिस प्रकार मानव तन में पहले आई जिव्हा जो अंत तक बनी रहती है और बाद में आए दांत जो जीवन में बीच में ही नष्ट होकर गिर जाते हैं। अर्थात कठोरता जल्दी नष्ट होती है और कोमलता हमेशा बनी रहती है। जीवन में दांत की तरह कठोर नहीं बल्कि जिव्हा की तरह मुलायम बनें। आंधी -तूफान में अकड़ने वाले वृक्ष स्वयं नष्ट हो जाते हैं परंतु झुकने वाली दूब घास हरी-भरी घनी बनी होकर पैरों को कोमलता प्रदान करती है।