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सुख-समृद्धि का संयोग लेकर आएगी महाशिवरात्रि
abhishek70dev@rediffmail.com
शिवरात्रिका महापर्व इस बार सुख-समृद्धि का संयोग लेकर आएगा। 17 फरवरी मंगलवार को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दौरान गुरु-शुक्र उच्च राशि में होंगे, जो शिव भक्तों को विशेष फल प्रदान करेंगे। साथ ही मानस योग, गजकेसरी योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन होने से महाशिवरात्रि पर शिव आराधना श्रद्धालुओं के लिए कई गुना फलदायक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित विजयभूषण वेदार्थी के मुताबिक उदयकाल में त्रयोदशी तिथि मंगलवार दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी, जो बुधवार सुबह 9.02 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी की रात्रि में किया जाता है। इसलिए मंगलवार 17 फरवरी को ही शिव रात्रि मनाई जाएगी। इस दिन मानस योग के साथ ही प्रात: से दोपहर 12.36 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा, जो श्रद्धालुओं को मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला है। इस शिवरात्रि में गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि में गजकेसरी योग में स्थित है। साथ ही शुक्र ग्रह भी अपनी उच्च राशि में भ्रमण करेगा। इसलिए इस दिन की गई शिव आराधना इस लोक में और परलोक में सुख प्रदान करने वाली होगी।
ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्रनाथ पांडेय के अनुसार शिवरात्रि पर ध्वज योग, सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस कारण कारण मूल्य वृद्धि में गिरावट आएगी। फसल अच्छी होगी। किसान खुशहाल रहेंगे।
ऐसे करें पूजन
महाशिवरात्रिपर उपवास कर शुद्ध अवस्था में भगवान शिव का जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद जल से भगवान शिव को स्नान कराएं। इसके बाद दुग्ध मिश्रित जल धारा से महाभिषेक कर वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, भस्म, अक्षत और अकौआ का फूल, कनेर, बेलपत्र, मौलश्री, धतूरा, पुष्प, भांग अर्पित करें।
चार प्रहर में चलेगी शिव पूजा
ज्योतिर्विदडॉ. एचसी जैन के अनुसार महाशिवरात्रि पर चार प्रहर तक की गई शिवजी की पूजा श्रेष्ठ फल देने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली है।
चारप्रहर की पूजा के लिए समय
प्रथमप्रहर: शाम 6.16 बजे से
द्वितीय प्रहर: रात 9.29 बजे से
तृतीय प्रहर: अर्द्ध रात्रि 12.37 बजे से
चतुर्थ प्रहर: अर्द्ध तड़के 3.54 बजे से
महापर्व 17 को