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जेल में नहीं, जेएएच में होगा कैदी का इलाज

7 वर्ष पहले
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जेलमें बंद कैदी के साथ मारपीट करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर घायल कैदी का सोमवार को मेडिकल बोर्ड ने परीक्षण किया। मेडिकल बोर्ड ने कैदी का जयारोग्य चिकित्सालय में इलाज कराने के निर्देश जेल प्रशासन को दिए। पूर्व में जेएएच में इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई थी तो उसे एम्स दिल्ली भेजना पड़ा था। उधर जेल अस्पताल इसके सामान्य होने की रिपोर्ट दे चुका था। दिल्ली से लौटने के बाद उसका जेल में ही इलाज किया जा रहा था, जिस पर उसके परिजन ने न्यायालय में याचिका लगाई थी।

सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे भोला उर्फ जितेंद्र गर्ग का सोमवार को मुरार अस्पताल में मेडिकल बोर्ड ने परीक्षण किया। मेडिकल बोर्ड में डॉ. विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. एसके श्रीवास्तव, डॉ. आरके प्रसाद डॉ. सुषमा भार्गव शामिल थीं। जून माह में जितेंद्र की जेएएच में हालत बिगड़ने पर उपचार के लिए एम्स रैफर किया गया था। वहां से लौटने के बाद उसका इलाज जेल में ही कराया जा रहा था। जहां उसकी हालत बिगड़ने पर पिता ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कैदी को मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। भोला के हिप्स और पीठ में मारपीट के गहरे घाव हैं। साथ ही उसकी किडनी भी खराब हो गई है। भोला सात वर्ष से जेल में बंद हैं। मेडिकल बोर्ड ने कैदी का परीक्षण किया, जिसमें उसकी हालत गंभीर बताई गई। बोर्ड ने उसका इलाज जयारोग्य चिकित्सालय में कराए जाने के निर्देश दिए हैं। भोला की मां निर्मला गर्ग ने इस संबंध में महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर पूरी घटना की शिकायत की है। 18 जून तक उसका कोई इलाज नहीं कराया गया। 18 जून को हालत बिगड़ने पर उसे जेएएच के आईसीयू में भर्ती कराया गया और डॉक्टर्स की सलाह पर वहां से उसे एम्स ले जाया गया।