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नसबंदी कर खुले में लिटाया, ठंड से कांपती रहीं महिलाएं
जिलाअस्पताल मुरार में हस्तिनापुर ब्लॉक से नसबंदी कराने के लिए लाई गईं 30 महिलाओं में से कुछ को ऑपरेशन के बाद अस्पताल के बाहर जमीन पर लिटा दिया गया। इन महिलाओं को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। महिलाओं के परिजन का कहना था कि वार्ड से उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि केवल प्रसूताएं ही भर्ती की जाती हैं। इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने पूरे प्रबंध किए थे। ऑटो के इंतजार में कुछ महिलाएं बाहर बैठी थीं।
छत्तीसगढ़ राज्य में नसबंदी के दौरान की गई लापरवाही से तीन दर्जन से अधिक महिलाओं की मौत हो चुकी है। इसके बाद शिवपुरी जिले में भी नसबंदी से हुई महिलाओं की मौत पर सवाल खड़े हुए हैं। केन्द्र एवं राज्य शासन ने नसबंदी ऑपरेशन के दौरान पूरी एहतियात बरतने तथा व्यवस्थाएं बेहतर करने के आदेश जारी किए हैं लेकिन ग्वालियर जिले में इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा। सोमवार को जिला अस्पताल के प्रसूति गृह में महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन किए जा रहे थे। इसके लिए हस्तिनापुर ब्लॉक से 30 महिलाओं को जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉ. रजनी जैन ने महिलाओं के ऑपरेशन किए लेकिन इन महिलाओं केा भर्ती करने के पर्याप्त प्रबंधन नहीं किए। इनमें से कुछ महिलाओं को अस्पताल के बाहर खुले में लेटना पड़ा। जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन की नींद खुली और महिलाओं को वार्ड में भर्ती कराया गया। अस्पताल के बाहर लेटी महिलाएं बेहोशी की अवस्था में भी ठंड से कांप रहीं थीं। उन्हें कंबल भी नहीं दिए गए। ऑपरेशन के बाद महिलाओं की देखरेख के लिए नर्स एवं वार्ड ब्वॉय भी उपलब्ध नहीं थे। सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार गुप्ता का कहना है कि ड्यूटी डॉक्टर से मिली जानकारी के अनुसार ऑपरेशन के बाद कुछ महिलाएं घर जाने के लिए बाहर बैठी थीं।
नसबंदी ऑपरेशन के बाद जिला अस्पताल मुरार के बाहर खुले में लेटी महिलाएं। फोटो:भास्कर
अस्पताल प्रबंधन को करनी थी व्यवस्था
^फैमिलीप्लानिंग के इंचार्ज डॉ. एसएस जादौन को भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हस्तिनापुर के ऑपरेशन विगत कई वर्षों से जिला अस्पताल में होते हैं। अस्पताल प्रबंधन को ही मरीजों की समुचित करनी चाहिए थी।\\\'\\\' डॉ.अनूप कम्ठान, सीएमएचओ