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जमीन का बंटरबांट

7 वर्ष पहले
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जीडीए की करोड़ों की

जीडीएनेजिस जमीन के लिए सोसायटी से एग्रीमेंट किया था, उसी जमीन से जीडीए का नाम हटाकर उसे बेचने की तैयारी की जा रही है। ग्वालियर विकास प्राधिकरण की विनय नगर योजना के लिए जनक गृह निर्माण सहकारी संस्था ने एग्रीमेंट कर वर्ष 1989 में 6.18 बीघा से अधिक जमीन सरेंडर की थी। इसमें ग्राम आऊखाना कलां के 14 सर्वे क्रमांक शामिल थे।

जमीन सरेंडर होने के बाद राजस्व रिकॉर्ड के खसरे में मालिकाना हक के तौर पर जीडीए का नाम शामिल कर लिया गया, लेकिन बाद में अफसरों की मिलीभगत के चलते वर्ष 1997 में जीडीए का नाम खसरे से गायब हो गया। हाल ही में संस्था के माध्यम से जमीन देने वाले तत्कालीन भूमि स्वामी रामरतन सिंह कुशवाह के पुत्र ओमप्रकाश कुशवाह ने इस जमीन के सीमांकन का मामला तहसीलदार के पास दायर किया। इसमें सर्वे क्रमांक 463, 464 और 465 की जमीन को शामिल किया गया। मौके पर सीमांकन की स्थिति को देखते हुए जीडीए के अफसरों ने भी हस्तक्षेप किया कि जमीन प्राधिकरण की है और उसमें सीमांकन किया जाए। इसके बावजूद तहसीलदार ने मौके पर सीमांकन कर दिया। ऐसे में अब ओमप्रकाश कुशवाह इस जमीन की सौदेबाजी में लगे हुए हैं। मौके पर बोल्डर पत्थरों की बाउंड्रीवॉल बना दी गई है। >शेषपेज-3

^सीमांकन रोकनेको कहा था

जीडीए की भूमि पर तहसीलदार राजस्व निरीक्षक द्वारा सीमांकन और बटांकन की कार्रवाई की जा रही थी, तभी मैंने तहसीलदार को कार्रवाई रोकने के लिए कहा था। अब आप इस मामले में नए सीईअो से बात कीजिए।

वीकेशर्मा, तत्कालीनसीईओ, ग्वालियर विकास प्राधिकरण

^मामले कीजांच करा रहे हैं

जीडीए की जमीन पर तहसीलदार द्वारा सीमांकन और बटांकन करने की शिकायत मेरे पास आई थी। हम इस मामले का परीक्षण करा रहे हैं, उसके बाद इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पी.नरहरि, कलेक्टर