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संगीत के सुर, राजनीति का मध्यांतर फिर तानसेन सम्मान

7 वर्ष पहले
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भारतीयशास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन तानसेन संगीत समारोह के मंच पर शुक्रवार को प्रख्यात गायक पं. प्रभाकर कारेकर को वर्ष 2013-14 का तानसेन अलंकरण सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान के रूप में दो लाख रुपए की राशि, शॉल आैर प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। ऐन वक्त पर कार्यक्रम में हुए बदलाव के चलते संगीत के इस परंपरागत समारोह के मंच पर छिड़े संगीत के सुरों के बीच में उपस्थित हुई राजनीति ने मध्यांतर भी किया। इसके बाद पं. कारेकर को तानसेन अलंकरण प्रदान किया गया और फिर समारोह से राजनेताओं के प्रस्थान ने एक बार फिर माहौल में संगीत की स्वरलहरियों की गूंज का मार्ग प्रशस्त कर संगीतरसिकों को तृप्त किया। शेष|पेज14 पर

(कलाकार की..., पढ़ें|सिटी भास्कर पेज-1)

केंद्रीय मंत्री तोमर ने दिलाई घोषणाओंकी याद

पं.कारेकरको सम्मानित कर हम खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। मैं संस्कृति मंत्री से अनुरोध करना चाहूंगा कि ग्वालियर का ध्रुपद केंद्र सरकार के सानिध्य का मोहताज है। उसे सरकार का सानिध्य मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी ग्वालियर में ध्रुपद समारोह का आयोजन होगा, जो नहीं हुआ। महाराजा मानसिंह कला अलंकरण पुरस्कार भी शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह संगीत विवि की भी आवश्यकताएं हैं। -नरेंद्रसिंह तोमर, केंद्रीयमंत्री

यह मेरे गुरुजनों का सम्मान

यहसम्मान सिर्फ मेरा नहीं बल्कि मेरे उन गुरुजनों का है जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया है। पचास साल की संगीत यात्रा के बाद मुझे यह सम्मान मिला है, इसके लिए मैं यहां के कलारसिकों को प्रणाम करता हूं।

पं.प्रभाकर कारेकर

गायक पं. प्रभाकर कारेकर को तानसेन सम्मान से नवाजा गया। फोटो:विक्रम प्रजापति