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कलाकार की ताल पर श्रोताओं की दाद

7 वर्ष पहले
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त्रिस्तरीयमंच, पंडाल में बैठे रसिकश्रोता और मंच से प्रस्तुति देते ध्रुपद और खयाल गायकी को पेश करते ख्यातिनाम संगीतज्ञ। बीच-बीच में गायन और वादकों का साथ गुनगुनाते श्राेता। कुछ ऐसा ही माहौल दिखा शुक्रवार को तानसेन संगीत सभा के पहले दिन का। चार दिवसीय तानसेन संगीत समारोह का आगाज शाम की सभा में माधव म्यूजिक कॉलेज के स्टूडेंट्स और टीचर ने तानसेन के प्रशस्ति गान से हुआ।

इसके बाद मंच संभाला कोलकाता के सितार वादन पार्थाे बोस ने। उनके वादन में मैहर घराने की झलक साफ दिखाई देती है।

देर रात तक चली संगीत सभा में तानसेन अलंकरण से सम्मानित पंडित प्रभाकर कारेकर और दरभंगा के ध्रुपद गायक रामकुमार मलिक ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन अशोक आनंद ने किया।

हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर चार दिवसीय संगीत समारोह की प्रथम संगीत सभा में माधव संगीत कॉलेज के स्टूडेंट्स ने तानसेन प्रशस्ति गायन \\"ध्रुव कंठ स्वराेदगार...\\' को पेश किया। फोटो: विक्रम प्रजापति

tansen samaroh

रागदारी में इतिहास के झरोखे

समाधि स्थल पर रागदारी फोटो एक्जीबिशन में आलमनामा और हरिकथा को लगाया गया है। इस फोटो एक्जीबिशन को फोटोग्रॉफर केदार जैन के फोटो संग्रह को लगाया गया है। इनमें उस्ताद अलाउद्दीन खां और ढोलीबुआ की यादों को शामिल किया गया है। यह एक्जीबिशन 14 दिसंबर तक समाधि स्थल पर रहेगी।

सितार में झलका मैहर घराना

छह वर्ष की आयु से गुरु-शिष्य से परंपरा से संगीत की शिक्षा लेने वाले कोलकाता के पार्थो के वादन में आज अलग ही अंदाज दिखा। मंच पर प्रस्तुति से पहले उन्होंने तानसेन की समाधि को प्रणाम किया और इसके बाद श्रोताओं को अपनी प्रस्तुति के संदर्भ में बताया। शुद्ध राग विहाग में अलाप, जोड़, झाला पेश किया। इसके बाद तीन ताल में निबद्ध गतकारी पेश की। उनके साथ तबले पर संगत दुरजन भौमिक ने की।

सुबह हुई हरिकथा और मिलाद

सुर सम्राट तानसेन की स्मृति में समाधि स्थल पर परंपरागत ढंग से उस्ताद मजीद खा ने शहनाई वादन पेश िकया। इसके बाद नए ढोलीबुआ महाराज नाथपंथी संत संतोष पुरंदरे ने संगीतमय आध्यात्मिक प्रवचन दिए। उन्होंने अपनी प्रस्तुति को विराम आपहि खेल खिलाड़ी आपहि धर्मधारी है को पेश किया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के मौलाना इकबाल मोहम्मद ने दरबार-ए-मौहम्मद कब्बाली पेश की। इसके बाद मिलाद शरीफ की रस्म की।

समाधि स्थल