ग्वालियर. मानवी कोमाता-पिता की देखरेख प्यार-दुलार की जरूरत है। मानवी जैसी परिस्थितियों में किसी भी छात्रा का मन पढ़ाई, खेल या दूसरी गतिविधियों में नहीं लग सकता। इसलिए परिवार उसे अपने साथ रखे। यह आदेश कलेक्टर न्यायालय ने मानवी प्रकरण की सुनवाई के बाद गुरुवार को दिया।
उल्लेखनीय है कि मानवी को बीमार बताकर सिंधिया कन्या विद्यालय प्रबंधन ने उसे हॉस्टल में रखने से इनकार कर दिया है। इसके खिलाफ ही मानवी के परिजन ने कलेक्टर न्यायालय में फरियाद की थी। दो दिन पहले इस प्रकरण में अंतिम बहस हो चुकी है।
कलेक्टर पी. नरहरि ने विद्यालय प्राचार्य प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे छात्रा को टेस्ट, परीक्षा में शामिल कराएं, उसे स्पेशल कोचिंग ट्रेनिंग भी दें। श्री नरहरि ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे मानवी के माता पिता को उनकी बेटी की शिक्षा में जरूरी सहयोग दें।
मुझे न्याय नहीं मिला
मानवी की मां संध्या सिंह का कहना था कि उसकी बेटी को न्याय नहीं मिला। जो फैसला स्कूल ने किया था। वही कलेक्टर न्यायालय ने दिया है। इससे न्याय व्यवस्था से उसका विश्वास उठा है। संध्या सिंह का कहना था कि वह सोच विचार कर आगे निर्णय लेंगी।