आत्मा सिर्फ अनुभव की जा सकती है
ग्वालियर| आत्माका स्वरूप हम अनुभव तो कर सकते हैं लेकिन उसे देख नहीं सकते। जिस तरह मिश्री, गुड़ और शक्कर का स्वाद तुम्हें मीठा तो लगेगा, लेकिन यह पूछे जाने पर वह कैसा मीठा है तो तुम सिर्फ यही कहोगे कि खुद स्वाद लेकर देख लो। उक्त विचार जैन श्वेतांबर तेरापंथ के मुनिश्री आलोक महाराज ने सोमवार को समाधिया कॉलोनी में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
अहिंसा यात्रा को लेकर हुई बैठक
मुनिश्रीके प्रवचन के उपरांत जिन दत्त कुशल सूरि मंडल के सदस्यों की बैठक हुई। अहिंसा यात्रा के प्रभारी संजीव पारख ने बताया कि बैठक में आचार्य महाश्रमण महाराज की 20 दिसंबर को ग्वालियर आने वाली अहिंसा यात्रा पर चर्चा की गई। तेरापंथ समाज के अध्यक्ष अशोक बैद, अभिनंदन छाजेड़, राहुल छाजेड़ ने बताया कि 10 हजार किमी की अहिंसा यात्रा नौ नवंबर को दिल्ली से प्रारंभ हुई थी।