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अब रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलेंगी अबॉर्शन की दवाएं
आदेश
अबगर्भ समापन (मेडिकल अबॉर्शन) की दवाएं आसानी से मेडिकल स्टाेर्स पर नहीं मिल सकेंगी। एमटीपी एक्ट में रजिस्टर्ड प्रैक्टिशनर के पर्चे पर लिखे जाने पर ही मेडिकल स्टोर संचालक अबॉर्शन की दवाएं देगा। दवा विक्रेता को गर्भ समापन दवा बेचने के बाद उसके बिल की प्रति रिकॉर्ड में रखनी होगी। कलेक्टर के निर्देश पर इस आशय के आदेश ड्रग इंस्पेक्टर रजनीश चौधरी ने सभी दवा विक्रेताओं को दिए हैं।
अबॉर्शन की दवाएं जिले में आसानी में मेडिकल स्टोर्स से मिल जाती हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जिले में गर्भ परीक्षण पर राेक लगाने में स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिली है। देखने में यह रहा है कि भिंड, मुरैना या समीपवर्ती उत्तरप्रदेश में महिलाएं गर्भ परीक्षण करवाने के बाद गर्भ समापन दवाओं का उपयोग गर्भ गिराने के लिए कर रही हैं। बिना डॉक्टर्स की सलाह के इन दवाओं के उपयोग से महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधित जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं। इसे देखते हुए ड्रग इंस्पेक्टर ने जिले के सभी थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के साथ-साथ दवा विक्रेता एसोसिएशन को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि गर्भ समापन की दवाइयां सिर्फ एमटीपी एक्ट में रजिस्टर्ड डॉक्टर्स के पर्चे पर ही दें। ये दवाएं अन्य डॉक्टरों के पर्चे पर बेचना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। दवा विक्रेता ये दवाएं बेचते समय बिल अवश्य दें और बिल की एक प्रति अपने रिकॉर्ड में रखें। साथ ही थोक दवा विक्रेता को भी गर्भ समापन दवाएं फुटकर दवा विक्रेता को बेचने के बाद उसका रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा। गौरतलब है कि जिले में कुल 78 डॉक्टर एमपीटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं।
उल्लंघन किया तो होगी जेल
ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जारी आदेश में सख्त हिदायत दी गई है कि यदि कोई दवा विक्रेता रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे के बिना अबॉर्शन की दवा बेचता है तो उसके खिलाफ एमटीपी एक्ट के उल्लंघन की कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत दवा विक्रेता को दो से सात साल तक की जेल का प्रावधान है।
रजिस्टर्ड डॉक्टर का पर्चा जरूरी
^अबॉर्शनकी दवा रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे के बिना कोई भी दवा विक्रेता नहीं बेच सकेगा। इस आशय के निर्देश सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को दिए गए हैं।साथ ही आईएमए को भी पत्र लिखा जा रहा है। रजनीशचौधरी, ड्रगइंस्पेक्टर