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समाधि पर अंतिम सभा में बेटियों ने थामीं घरानेदार परंपरा की डोर

7 वर्ष पहले
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तानसेनसंगीत समारोह का तीसरा दिन रविवार महिलाओं के नाम रहा। सुबह और शाम की संगीतसभा में कुल दस प्रस्तुतियां हुईं। इनमें गायन की सात और वादन की तीन। समारोह में खास बात यह रही कि सुबह और शाम दोनों ही सभा में गायकी में महिलाओं की प्रस्तुतियां खास रहीं।

सुबह की सभा में ग्वालियर घराने की गीतिका उमडेकर मसुरकर, आकाशवाणी की ग्रेड कलाकार मंजुषा कुलकर्णी पाटिल, डागरवाणी घराने की सलमा घोष की गायकी को सुनने के लिए श्रोताओं में उत्साह दिखाई दिया। वहीं शाम की सभा में मंजू मेहता ने सितार वादन से पंडित रविशंकर की याद दिला दी। अंतिम प्रस्तुति विनायक तोरवी ने दी। संचालन अशोक अानंद ने किया।

ग्वालियर घराने की गीतिका उमड़ेकर मसुरकर ने राग देव गंधार से गायकी का आगाज किया। उन्होंने इसमें विलंबित खयाल में रैन जागे और मध्य लय में लाड़ली बनावन आया... को बंदिश को आवाज दी। इसके बाद ग्वालियर घराने की पहचान टप्पा और तराने की प्रस्तुति दी।

ताल धमार में बजाई घरानेदार धुनें

मैहरघराने की सितार वादक मंजू मेहता ने अपने गुरु भारत र| पंडित रविशंकर के बनाए राग जोगेश्वरी को पेश किया। इसके बाद ताल धमार में ट्रेडिशनल धुन बजाई।

किंवदंति: संगीतसम्राट तानसेन के संबंध में एक किंवदंति यह भी है कि इनको जीवनदान जुड़वां बहनों ताना और रीरी ने दिया। बताते हैं कि अकबर ने तानसेन से दीपक राग गाने की जिद की, लेकिन तानसेन ने उन्हें बताया जब तक कोई मेघमल्हार राग गाने वाला नहीं होगा तब तक इस राग को नहीं गा सकते। अकबर की जिद के आगे मजबूर होकर तानसेन को दीपक राग गाना पड़ा। तानसेन के गाते ही दरबार में रखे सारे दिए अपने आप रोशन हो उठे। यह चमत्कार देखकर अकबर हैरान रह गए, लेकिन तानसेन का अंत:करण जल रहा था, वे व्याकुल हो कर वहां से बाहर निकल आए। तन-मन की जलन को मिटाने के लिए एक शहर से दूसरे शहर भटकने के बाद गुजरात के वड़ानगर पहुंचे। यहां जुड़वां बहनों ताना-रीरी ने तानसेन की परेशानी को भांप लिया और मेघमल्हार गाकर उनकी जान बचाई। जीवन बचाने वाली उन लड़कियों की याद में तानसेन ने ताना-रीरी रागिनी बनाई और इस तरह दोनों बहनों का नाम अमर हो गया।

tansen samaroh

तानसेन संगीत समारोह में रविवार को संगीत प्रेमियों की उपस्थिति रही सबसे ज्यादा।

दिन- सोमवारसमय-सुबह10:30 बजे सभास्थल- बेहट

छठवींसंगीत सभा- साधनासंगीत कला केंद्र ब