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राग, बंदिश पर पकड़ हो तो आप भी बन सकते हैं गायक

7 वर्ष पहले
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गीतकोई भी गुनगुना सकता है, लेकिन गायक वही बन सकता है जिसकी राग, बंदिश और ठेका पर पूरी पकड़ हो। इसके लिए जरूरी है संगीत की प्रारंभिक शिक्षा गुरु से लें और लयकारी के लिए ज्यादा से ज्यादा रियाज करें। यह बात ग्वालियर घराने के गायक शरद साठे ने कही।

वे रविवार को पड़ाव स्थित तानसेन कला वीथिका में वादी-संवादी व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। मुंबई से आए शरद साठे ने ग्वालियर घराने की पुरानी बंदिशों को पेश करते हुए लयकारी, ताल, अलाप, जोड़, झाला के बारे में जानकारी दी। साथ ही ग्वालियर घराने की पुरानी बंदिश में राग मियां मल्हार पेश किया। जिसमें बंदिश के बाेल थे \\\"मोहम्मद शाह रंगीले...\\\'। साथ ही दिल्ली से आए एस कालिदास ने भी बंदिशों के बारे में बताया।

नए कलाकार नहीं गाते पूरे शब्द

शरद साठे ने कहा कि नए गायक कलाकार कई बार गाते समय बंदिश पर ध्यान नहीं देते। यही वजह है कि बंदिश के पूरे शब्द बाेलकर उसे अधूरा ही सम पर खत्म कर देते हैं। नए कलाकारों को रियाज के समय विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तभी गायन बेहतर किया जा सकता है।

बंदिशों के साथ भाव जरूरी

गायन के समय हाव-भाव दिखाने के लिए हाथ और चेहरे के भावों का तालमेल जरूरी है। बंदिशें गाते समय हाथों का चलन के आधार पर ही चेहरे के भाव बदलने चाहिए। इससे गायन में जुड़ाव बेहतर होता है।

यह सब चीजें रियाज से पूरी होती हैं।

VYAKHYAN MALA

एक्सपर्ट ने कहा कि गायन के क्षेत्र में किताबें सिर्फ रेफरेंस की तरह होती हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जहां अधिक से अधिक समय का रियाज परफेक्शन लाता है। इसलिए अच्छे गायक कलाकार के लिए रियाज बहुत जरूरी है। उन्होंने इसकी बारीकियां भी बताईं।

स्वर-धुन: राग

अक्षर-शब्द:बंदिश

मात्रा-ताल-ठेका

प्रस्तुति के दौरान गायन की बारीकियां सिखाते गायक शरद साठे। फोटो: भास्कर