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स्कल्प्चर में दिखाई इमारतों में गुम होती प्रकृति

7 वर्ष पहले
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शहरोंमें बनतीं ऊंची-ऊंची इमारतें, पेड़ काटकर यह इमारतें बनाई जा रही हैं और इनके बीच प्रकृति कहीं खो सी गई है। जब व्यक्ति इन इमारतों के बीच खुद को पाता है तो तन्हा महसूस करता है। स्कल्प्चर के माध्यम से स्टूडेंट सरस्वती शर्मा ने यह बताने का प्रयास किया है। तानसेन कला वीथिका में आयोजित रंग संभावना एक्जीबिशन में स्कल्प्चर और पेंटिंग डिस्प्ले की गई हैं। इनमें ऑइल और एक्रेलिक कलर की पेंटिंग शामिल हैं। रविवार को भी बड़ी संख्या में लोग एग्जीबिशन देखने के लिए कला वीथिका पहुंचे। तीन दिवसीय एक्जीबिशन का समापन सोमवार शाम को होगा।

तानसेन कला वीथिका में लगी एक्जीबिशन में बेटी बचाओ थीम पर आधारित स्कल्प्चर। दूसरे चित्र में \\\"इमारतें\\\' थीम पर बना स्कल्प्चर देखती युवती। तीसरे चित्र में प्रदर्शित पेंटिंग। फोटो: भास्कर

painting exhibition

सौरभ ने स्क्रेप से स्कल्प्चर बनाया है। इसमें मां बेटी का प्यार दिखाया गया है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हर कड़ी में मां बेटी की सूरत जैसी आकृति बन रही है। इसके अलावा फाइबर, वुड और स्क्रेप के कई स्कल्प्चर पेश किए गए हैं।

घुंघरू का कलर कहीं हल्का है तो कहीं गहरा। इन्हें गौर से देखने पर आपको अलग ही सुकून मिलेगा। पीसफुल नामक इस पेंटिंग में कुछ इसी अंदाज में बनाया गया है।