पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • आरोपी के सरेंडर के बाद वारंट वापस बुलाना बाबू की जिम्मेदारी: एडीजे सिंह

आरोपी के सरेंडर के बाद वारंट वापस बुलाना बाबू की जिम्मेदारी: एडीजे सिंह

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ग्वालियर. आरोपी के कोर्ट में सरेंडर होने के बाद उसके खिलाफ जारी किए गए वारंट को कोर्ट बाबू वापस बुलाए। यह उसकी जिम्मेदारी है। अगर वारंट वापस नहीं लिया तो पुलिस आरोपी दोनों परेशान रहेंगे। यह बात जिला न्यायालय स्थित मीडिएशन हॉल में शनिवार को एडीजे अजीत सिंह ने कोर्ट बाबुओं के बीच कही। वे कोर्ट बाबुओं को कार्य में गुणात्मक सुधार की ट्रेनिंग दे रहे थे। यह दो दिवसीय ट्रेनिंग हाईकोर्ट के निर्देश पर दी गई।

वहीं एडीजे सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि किसी लंबित प्रकरण से संबंधित फाइल का कोई कागज किसी अपरिचित व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। मामले के डिस्पोज ऑफ होने पर आदेश को कीपिंग सेक्शन के माध्यम से विधि अनुसार ही जारी किया जा सकता है। एडीजे पीके अग्रवाल ने कहा कि नोटिस, समन या वारंट की तामील हुई है या नहीं, इसकी जानकारी फाइल पर नोट करना आवश्यक है।
समन किसी पक्षकार को कोर्ट में बुलाने के लिए जारी किया जाता है, वहीं सूचना पत्र या नोटिस पक्षकार से जवाब तलब के लिए जारी किया जाता है। विशेष नगर निगम मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार सक्सेना ने कर्मचारियों से कहा कि कोर्ट के आदेश को शुद्धता से लिखना गोपनीयता बनाए रखना चाहिए।

गवाही के दिन ही मिले भत्ता

कोर्टजब किसी मामले में साक्ष्य के लिए पक्षकार या शासन पक्ष के गवाह को बुलाता है तो उसको किराया भोजन भत्ता दिलाना भी कोर्ट बाबू की जिम्मेदारी है। इसके लिए कोर्ट बाबू निश्चित प्रोफार्मा भरकर कोर्ट कार्यालय में पेश करे ताकि गवाही के दिन ही गवाह को भत्ता मिल सके। यह समझाइश एडीजे अजीत सिंह ने कर्मचारियों को दी।