शुरू से ही खराब रहा हीटिंग प्लांट
एलएनआईपीई का स्वीमिंग पूल, जिसे सर्दी का हवाला देकर बंद कर दिया गया है।
कम आते हैं स्टूडेंट
सर्दियों में पूल में प्रैक्टिस करने के लिए कम ही छात्र आते हैं, इसलिए हमने इन्हें बंद किया है। जहां तक प्लांट की बात है, तो उसका कनेक्शन पूल से नहीं हुआ है।
प्रो.एलएन सरकार, रजिस्ट्रारएलएनआईपीई
कभी पैनल खराब हो जाते थे, तो कभी ऊर्जा ही एकत्र नहीं हो पाती थी
फाइल भी हो गई संस्थान से गायब
28 डिग्रीरखना था पानी का तापमान
प्लांट की खराबी को लेकर संस्थान ने बाद में ठेकेदार की गारंटी राशि जब्त कर ली थी, लेकिन इसके खिलाफ ठेकेदार ने कोर्ट में मामला दायर कर दिया। कोर्ट में जब इस मामले से जुड़ी फाइल मंगाई, तो पता चला कि संस्थान से यह फाइल ही गायब हो चुकी है। ऐसे में ठेकेदार की बाकी बची राशि का भी संस्थान काे भुगतान करना पड़ा।
इस प्लांट को लगवाते समय अफसरों ने तय किया था कि उन्हें पानी का तापमान लगातार 28 डिग्री सेल्सियस तक रखना है, ताकि स्वीमर्स को ठंड लगे, लेकिन ट्रायल में ही पता चला कि यह प्लांट अधिकतम 26 डिग्री सेल्सियस तक ही पानी को गर्म कर सकता है। अफसरों ने 26 डिग्री सेल्सियस की शर्त पर भी इसे स्वीकार कर शुरू करा दिया।
ग्वालियर
एलएनआईपीईमें इस वाटर हीटिंग प्लांट का निर्माण लगभग आठ साल पहले कराया गया था, लेकिन इसका कभी लगातार इस्तेमाल नहीं किया जा सका। प्लांट के उद्घाटन के बाद से एक सीजन में इसका इस्तेमाल किया गया था, लेकिन गर्मी के मौसम में उपयोग होने के कारण यह खराब हो गया। अफसरों ने कुछ वर्षों बाद इसकी दोबारा सुध ली और इसे दुरुस्त भी कराया, लेकिन प्लांट में दिक्कतें लगातार बनी रही हैं। कभी गर्म पानी से पाइप खराब हो जाते थे, तो कभी सोलर पैनल में ऊर्जा इकट्ठी नहीं हो पाती थी, जिसके चलते पानी गर्म ही नहीं होता था। अब तो ये बिलकुल ही काम नहीं कर रहा है।
^अफसरों सेबात करें
इससंबंध में आप अफसरों से ही बात कीजिए। वाटर हीटिंग प्लांट को ठीक कराया जा रहा है या नहीं, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।
विनीतावाजपेयी मिश्रा, असिस्टेंटप्रोफेसर एवं तरणताल प्रभारी