आकलन बिजली कंपनी का, आफत हमारी
पेशेसे ड्राइवर मनीष कुमार निवासी थाटीपुर के कमरे में एक सीएफएल, एक पंखा लगा हुआ है। मनीष का बिल कभी दो सौ रुपए से ज्यादा नहीं आया लेकिन बिजली कंपनी ने मनीष को पिछले माह का बिल पांच हजार रुपए का थमा दिया। इसमें आकलित खपत जोड़ दी गई है।
~200 से ~900 गया बिल
प्रेमवतीकाशी निवासी मुरार के घर हर माह ढाई सौ से तीन सौ रुपए का बिल आता था। इस महीने 900 रुपए बिल गया है। बिल में 120 यूनिट आकलित खपत लगकर आई है। कोई उनकी शिकायत तक नहीं सुन रहा है।
उपभोक्ता एई से करें शिकायत
^बिनावजह आकलित खपत नहीं लगाई जाती है। अगर ऐसा हो रहा है तो उपभोक्ता संबंधित जोन के एई से संपर्क कर सकते हैं। रीडिंग हो पाने की स्थिति में ही आकलित खपत भेजी जाती है।\\\'\\\' संदीपकालरा, डीजीएम,बिजली कंपनी
नगर संवाददाता| ग्वालियर
बारहदिन पहले शहर आए बिजली कंपनी के एमडी अफसरों को रेवेन्यू बढ़ाने की नसीहत दे गए थे। बिजली अफसरों ने इसके लिए बिलों में आकलित खपत लगाना शुरू कर दिया है। उपभोक्ताओं के बिलों में सौ-सौ यूनिट आकलित खपत दी जा रही है। यदि वे शिकायत करें तो स्टाफ कहता है कि बिल तो भरना ही पड़ेगा।
यदि कोई उपभोक्ता अधिकारी के चक्कर काट लेगा, उसकी आकलित खपत हट सकती है लेकिन जिन्हें जानकारी नहीं, उनके लिए परेशानी ज्यादा है। सितंबर माह में जारी हुए बिलों में हजारों उपभोक्ताआंे को आकलित खपत लगाकर दे दी गई है जबकि बिजली एक्ट कहता है कि रीडिंग हो पाने पर ही आकलित खपत दी जा सकती है।
फीडरमीटर टोटल लोड में अंतर तो चोरी: शहरमें हर फीडर पर मीटर लगे हैं जो फीडर के सभी उपभोक्ताओं के लोड को कैलकुलेट करता है। यदि उपभोक्ताओं के लोड और फीडर के मीटर के लोड में ज्यादा अंतर आता है तो बिजली कंपनी उस एरिया में चोरी मानती है।