\"कर्म का फल सभी को भोगना पड़ता है\'
ग्वालियर| तुमयदि अग्नि में हाथ दोगे तो निश्चित ही हाथ जलेगा और बर्फ पर हाथ रखोगे तो हाथ ठंडा हो जाएगा। इसी तरह यदि पाप का फल पाप ही होगा और पुण्य का फल पुण्य होगा। तुम कितनी भी पूजा-भक्ति कर लो, पाप कभी पुण्य नहीं हो सकता और पुण्य कभी पाप नहीं हो सकता। जो किया है, वह तो भोगना ही पड़ेगा। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री पुलक सागर ने जैन छात्रावास में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि कर्म के फल से भगवान राम और महावीर भी नहीं बच सके। कर्म का फल सभी को भोगना पड़ता है। पूजा करने से बच रहे हो तो कोई बात नहीं, आज नहीं तो कल तुम्हें भगवान की शरण में आना ही पड़ेगा लेकिन खोटे काम से बचो। खोटे काम ही तुम्हारे जीवन को खट्टा बना देंगे।