पॉकेटमनी से उठा रहे हैं पढ़ाई का खर्चा
कक्षाचारमें पढ़ने वाली रोशनी और कक्षा तीन की सरस्वती सहित लगभग आधा सैकड़ा बच्चे शाम चार बजते ही सिटी सेंटर स्थित कैलाश विहार पहुंचकर अपने टीचरों का इंतजार करते हैं। कुछ समय पहले तक पैसों के अभाव में ये बच्चे या तो माता-पिता के साथ मजदूरी करते या फिर खेल-कूदकर दिन गुजार देते थे।
कुछ इंजीनियरिंग छात्र इसी इलाके में कोचिंग पढ़ने जाते, तो रोजाना बच्चों को घूमते देखते थे। ऐसे में इन छात्रों ने आपस में सलाह करने के बाद इन बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया। इसके लिए जब बच्चों के माता-पिता से बात की, तो उन्होंने पैसा होने की बात कही। तब छात्रों ने अपने परिजनों और दोस्तों से आर्थिक मदद हासिल की कुछ बच्चों के लिए ड्रेस और किताबों की व्यवस्था की। इसके बाद एक एनजीओ खोला। इससे जितने भी सदस्य जुड़ते गए, उन्होंने अपने-अपने स्तर पर पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था शुरू कर दी। इनकी क्लास में अब लगभग 50 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए मुस्कान के 200 सदस्य अपनी ड्यूटी भी फिक्स कर चुके हैं।
^पढ़ना अच्छालगता है
मुझेयहां पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि यहां सभी लोग हमें अच्छे से समझाते हैं और मेरे जैसे और भी बच्चे यहां पढ़ने के लिए आते हैं।
रोशनी,स्टूडेंट
^मेरे दोनोंबच्चे पढ़ते हैं
गरीबीके कारण मैं अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पा रही थी। जब यह क्लास खुली, तो मैंने अपनी बेटी को यहां भेजना शुरू कर दिया। अब मेरा बेटा भी यहां पढ़ने आता हैे।
राधाबाई,अभिभावक
^बच्चों कीजिम्मेदारी उठाएंगे
इनबच्चों को पढ़ाने के लिए मैंने और मेरे कुछ दोस्तों अपना जेब खर्च बचाकर पैसे जमा किए और इन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया। हम 50 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं और भविष्य में भी उठाएंगे।
अभिषेकदुबे, बीईछात्र
^बच्चों मेंपढ़ने की लगन है
जबक्लास में बच्चे आते हैं, तो उनका उत्साह देखते ही बनता है। क्लास में इन्हें जो होम वर्क दिया जाता है, उसे ये पूरा करके लाते हैं। हमें भी इन बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है।
उत्कर्षशर्मा, बीईछात्र