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मन की कुटिया रंगी जिसमें...

रंगरोगन से रंगलिये कोठी, महल, मकान, मन की कुटिया रंगी, जिसमें है भगवान। अलीगढ़ से आए कवि गाफिल स्वामी ने यह...

Dainik Bhaskar

Nov 17, 2014, 03:05 AM IST
मन की कुटिया रंगी जिसमें...
रंगरोगन से रंगलिये कोठी, महल, मकान, मन की कुटिया रंगी, जिसमें है भगवान। अलीगढ़ से आए कवि गाफिल स्वामी ने यह पंक्तियां पढ़ीं। अवसर था तानसेन नगर स्थित राजबाला भवन में आयोजित "एक शाम पांच कवियों के नाम' कार्यक्रम का। रानीराजबाला शिक्षा एवं समाज सुधार समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राम विद्रोही ने की। संचालन घनश्याम भारती ने किया।

शायर कासिम रसा ने कहा कि

हरी नहीं है मगर शाख काटते क्यों हो, ये जाने कितने परिंदों को आसरा देगी, मैं बेकसूर हूं साबित करूं तो क्या होगा, मुझे पता है दुनिया मुझे सजा देगी।

रामअवध विश्वकर्मा ने कहा कि

मिलेगी सब को रोजी और रोटी , लगी है हाथ जादू की छड़ी अब

संसद की गरिमा से क्या लेना देना, संसद में जूता निकाल के बैठा हूं

कवि डॉ.देवेंद्र देव ने कहा कि

मिला बहुत कुछ देर-सवेरे, रास नहीं आया आज उम्र के उत्तरार्ध में गिन-गिन कर जोड़ा, कुछ घंटे, कुछ मिनट जिंदगी अपने हक निकली।

सुधीर कुशवाह ने कहा कि

धरती पर हरियाली लिखना, रोज घटाएं काली लिखना मुझको तो मुश्किल लगता है, दुश्मन को भी गाली लिखना।

poetry event

एम शाम पांच कवियों के नाम कार्यक्रम में रचना पाठ करते कवि डॉ.देवेंद्र देव।

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