सुरों की बारिश में भीगते रहे श्रोता
सर्दहवा के झोंके, रिमझिम बारिश की फुहार और मौसम ऐसा कि लोंगों को कपकपी तक जाए। ऐसे सर्द मौसम में भी गायक-वादकों के साथ रसिकप्रेमियों का उत्साह भारी रहा। सुबह की संगीत सभा में जहां बारिश ने व्यवधान डालने का प्रयास किया। वहीं शाम की सर्द हवा ने श्रोताओं और कलाकारों की दूरी बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन इन सभी के वावजूद संगीतप्रेमियों का उत्साह इस हद तक चरम पर रहा कि पंडाल में इनकी उपस्थति कम नहीं हुई। चार दिवसीय तानसेन संगीत समारोह के दूसरे दिन शनिवार को कुल दस प्रस्तुतियां हुईं। इनमें गायन की आठ और वादन की दो प्रस्तुतियां हुईं। हालांकि सुबह की सभा बारिश के कारण देरी से शुरू हो सकी।
दिन- 14दिसंबर (रविवार)
समय-सुबह9:30 बजे
सभास्थल-तानसेनसमाधि स्थल
संगीतसभा- शंकरगांधर्व संगीत महाविद्यालय का ध्रुपद गायन, भोपाल ध्रुपद केंद्र का गायन, ग्वालियर की गीतिका उमड़ेकर मसूरकर का गायन, दिल्ली के जाहिद खां एवं नासिर देसाई का सुरबहार की जुगलबंदी, पुणे की मंजूषा कुलकर्णी का गायन।
समय-शाम6:30 बजे
संगीतसभा- तानसेनसंगीत महाविद्यालय का गायन, मुंबई की सलमा घोष का गायन, दिल्ली के राशिद मुस्तफा का तबला वादन, अहमदाबाद की मंजू मेहता का सितार वादन, बैंगलुरू के विनायक तोरवी का गायन।
समय-दोपहर3बजे स्थान-कलावीथिका संगीत घरानों पर व्याख्यान।
ऐसी छवि तोरी समझत नाहीं
ध्रुपद केंद्र ग्वालियर के स्टूडेंट्स ने राग पूरिया धनाश्री में अलाप, जोड़, झाला से गायकी की शुरुआत की। सूलताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे \\\"ऐसी छवि तोरी समझत नाहीं...\\\'। इसके बाद अगली प्रस्तुति में जलज सूलताल में \\\"सुंदर अति नवीन प्रवीण...\\\' प्रस्तुत किया।
शाम की संगीत सभा की शुरुआत भारतीय संगीत महाविद्यालय के स्टूडेंट्स ने राग केदार से की। उन्होंने \\\"गावत सुघर गुनी सुध मुद्रा, सुध वाली श्रुती कला गुणी...\\\' बंदिश की प्रस्तुति दी।
बजाए राग बसंत: दिल्लीकी अनुप्रिया देवताले ने मौसम के अनुरूप राग बसंत बुखारी में मेघों की धुनों की तान वायलिन से छेड़ी। श्रोताओं की फरमाइश पर पसंदीदा धुने भी बजाईं।
काहे नींद जगाई बलमा: दिल्लीकी संहिता नंदी ने राग बैरागी में बंदिश काहे नींद लगाई बलमा से शुरुआत की। इसके बाद मियां की टोड़ी में बंदिल अल्लाह जाने-मौला जाने की प्रस्तुति दी।
tansen samaroh
मोरी अरज सुनो...
\\\"एपरवर दिगार तू ही.