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भगवान भक्ति रूपी नेत्र से ही दिखते हैं: संतश्री
ग्वालियर| भगवानइन आंखों से नहीं ज्ञान भक्ति की आंखों से ही दिखते हैं। परमात्मा धन के मोल नहीं मिलते बल्कि प्रेम के मोल मिलते हैं। सांसारिक वस्तुएं कीमत से नहीं वह तो किस्मत से मिलती हैं। यह बात रामस्नेही संप्रदाय के संत गोपालराम महाराज ने मंगलवार को रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने बताया कि नरसी मेहता के जीवन में धर्ममय कर्म के साथ तन मन को प्रभु भक्ति में डुबोए रखने की आदत सी हो गई थी। उन्हें पागल, दीवाना या मस्ताना ऐसी बातों को सहने की रहने की आदत हो गई थी। एक पर ही नहीं अनेक भक्तों पर भक्ति का रंग जिस प्रकार बढ़ता है। उन सभी का जीवन जीने का ढंग बदल जाता है। जिसके विचार श्रेष्ठ हों वही श्रेष्ठ कहलाता है नरसी मेहता भगवान के भी सेठ थे, तभी तो भगवान भी उनके नौकर बन गए।