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साल भर में पुलिस के हाथ आया सिर्फ एक सॉल्वर

7 वर्ष पहले
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पुलिसको पीएमटी फर्जीवाड़े में शामिल दो सौ से ज्यादा सॉल्वर्स की तलाश है लेकिन अभी तक एक ही सॉल्वर हाथ आया है। पुलिस की परेशानी यह है कि सॉल्वर्स को बुलाने वाले रैकेट के सदस्य इनके नाम और पते भूल गए हैं। इन लोगों का कहना है कि उन्हें जितने नाम याद थे, उन्होंने बता दिए हैं, और नाम याद नहीं हैं।

पकड़े गए रैकेट के सरगना ने स्वीकार किया कि ज्यादातर सॉल्वर कानपुर या लखनऊ से बुलवाए थे। अब उन्हें सॉल्वर्स के नाम याद नहीं हैं। साॅल्वर्स को शहर के रैकेट से मिलवाने वाले संतोष चौरसिया ने पुलिस को बताया है कि वह लखनऊ के सुरेंद्र वर्मा के माध्यम से सॉल्वर लाता था लेकिन सॉल्वर के नाम भूल चुका है। एक सॉल्वर सतना निवासी अभिनव सिंह ही पुलिस के हाथ आया है। इसने पुलिस को बताया कि उसने एक ही छात्र के लिए परीक्षा दी थी। पुलिस छह बार कानपुर और लखनऊ जा चुकी है लेकिन सॉल्वर्स का सुराग नहीं मिला। एसआईटी को पता चला है कि पिछले एक दशक में लगभग दाे सैकड़ा साॅल्वर परीक्षा दे चुके हैं। यह पकड़े जाएं तो कुछ और फर्जी मेडिकल छात्रों के नाम उजागर हो सकते हैं।

पकड़ने के लिए प्रयास जारी

^पकड़े गए आरोपियांे का कहना है कि वे सॉल्वरों के नाम और पते भूल चुके हैं। इसलिए परेशानी रही है। प्रयास किए जा रहे हैं ताकि सॉल्वर पुलिस के हाथ जल्द जाएं।\\\'\\\' वीरेंद्रजैन, एएसपी,एसआईटी प्रभारी