विपक्ष ने एसीएस, पीएस को लिया निशाने पर
सदनमें विपक्ष ने सत्तापक्ष को घेरने के साथ-साथ अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अफसरों को भी निशाने पर लिया। अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक मुकेश नायक ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव को घेरते हुए कहा कि मेरे क्षेत्र में बांध बना है, लेकिन पानी नहरों में नहीं छोड़ा जाता। प्रमुख सचिव से कहो तो वे कहते हैं, मैं क्या बताऊं?
नायक ने कहा, मैं कैबिनेट मिनिस्टर रहा हूं। अधिकारी फोन पर मुझसे ऐसे बात करेंगे तो बाकियों का क्या होता होगा? नायक ने कहा कि दरअसल उनपर ईमानदारी का भूत चढ़ा हुआ है, जबकि वे बिलकुल ईमानदार नहीं हैं। दूसरी तरफ ध्यानाकर्षण सूचना पर सवाल-जवाब के समय पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव पर आरोप लगाए गए। विधायक डॉ. गोविंद सिंह, उमंग सिंघार और हेमंत खंडेलवाल ने ई-पंचायत भवन में हुई अनियमितता का मामला ध्यानाकर्षण के जरिए उठाते हुए कहा कि प्री फैब्रिकेटेड पंचायत भवन बनाने का काम सीटेक इंवायर इंजीनियरिंग मुंबई को दिया गया। कंपनी ने घटिया निर्माण किया। बैतूल कलेक्टर ने इस पर ध्यान भी दिलाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब बीआरजीएफ योजना के तहत ई-पंचायत कक्ष ग्राम सभा के अनुमोदन पर बनने थे तो सीधे वल्लभ भवन से निर्देश क्यों जारी किए गए? कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। जवाब में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने माना कि गुणवत्ता में आंशिक कमी मिली, जिसके बाद कुछ राशि काटी गई है। साथ ही संबंधित कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया गया। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यह ठेका करीब 175 करोड़ का है। सदन में भार्गव ने बताया कि कंपनी की बैंक गारंटी भी विभाग के पास है।
वहीं, किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही मंत्रियों को घेर लिया।
शीतकालीन सत्र