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आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है: मुनिश्री

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर| मनुष्यका सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है। आलस्य से अनेक बीमारियां भी पैदा होती हैं। इसलिए जीवन में श्रम का महत्व है। उक्त विचार जैन श्वेतांबर तेरापंथ के मुनिश्री आलोक महाराज ने बुधवार को समाधिया कॉलोनी में धर्मसभा को सं‍बोधित करते हुए व्यक्त किए।

मुनिश्री ने कहा कि सेवा करने से अपनत्व का भाव बढ़ता है। लोगों को शांति मिलती है। इसलिए सेवा धर्म को अपनाना चाहिए। पारिवारिक सौहार्द और प्रेम के लिए एक -दूसरे को सहन करना चाहिए। कहा भी गया है कि जो सहता है वह रहता है। सहन करने वाला ही महान बनता है। मिट्टी कुम्हार की चोटों को सहन करती है तब सुंदर घड़े का निर्माण होता है। जीवन में संयम भी होना चाहिए। संयम सबसे बड़ी शक्ति है। संयम का तात्पर्य है स्व -नियंत्रण। अपनी मन और इंद्रियों का संयम करने वाला ही परम विजेता कहलाता है। अच्छा स्वभाव ही प्रभाव डालता है, इसलिए अपने स्वभाव को भी अच्छा बनाना चाहिए।