सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
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किसेविरासत सौंप रहे हो तुम अपनी, मिट्टी की बारात सजाकर। प्रलय की बारात सजाकर, कालिदास की शेष कथा तो तुमने कह दी। सुमन तुम्हारी शेष कथा अब कौन कहेगा। यह पंक्तियां गीतकार सुधाकर शर्मा ने डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन को समर्पित काव्य गोष्ठी में पढ़ीं। अवसर था साहित्य साधना संसद की काव्य गोष्ठी का। सनातन धर्म मंदिर में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रेमचंद्र सृजनपीठ के अध्यक्ष जगदीश सिंह तोमर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राधाकृष्ण मुरारी शर्मा ने की। गोष्ठी का शुभारंभ शैवाल सत्यार्थी ने किया।
जानकीप्रसाद विवश: भावनाओंकी सभा में पारित, प्यार का संविधान होता है।
दमोदरशर्मा: मैंकिसे मान लूं देवता। अश्रु से अर्घ मैंने दिए आहुति दे चुका प्राण की।
डॉ.भरतेंदु शुक्ल: गएये यमदूत मेरे द्वार, साधना मेरी अधूरी रह गई।
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\\\"किसे विरासत सौंप रहे हो तुम\\\'