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मूक-बधिर बच्चों के लिए दान में दी प्रॉपर्टी

6 वर्ष पहले
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/kpathak2010@yahoo.com

चिटनिस की गोठ की एक तंग गली में बने छोटे से फ्लैट में शोभना निर्वीकर रहती हैं। खास बात यह कि यहां आकर आप अगर आसपास के लोगों से उनके बारे में कुछ जानना चाहेंगे तो हो सकता है कि वे उन्हें जानने से ही इनकार कर दें। कारण, आसपास के लोगों के लिए वे शोभना निर्वीकर नहीं, बल्कि शोभा ताई हैं। 82 पड़ाव तय कर चुकीं शोभा ताई अकेली हैं। अपना एक बड़ा घर उन्होंने बरसों पहले मूक-बधिर बच्चों के कल्याण के लिए काम रही संस्था को दान कर दिया है। दूसरों को कुछ देने के सुख की झलक उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है। बढ़ती उम्र के साथ धुंधलाती आंखों में रोेशनी उस वक्त अचानक से बढ़ जाती है जब वे लड़खड़ाती आवाज में बताती हैं कि अब तो 50 से अधिक मूक-बधिर बच्चे ही उनकी जिंदगी हैं।

एक पुरानी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली शोभना निर्वीकर की शादी 1963 में बाल कृष्ण निर्वीकर के साथ हुई थी। उनके कोई संतान नहीं हुई। शादी के 25 साल बाद ही कैंसर के कारण पति का निधन हो गया। इसके बाद वे अकेली रह गईं। बावजूद इसके तो वे घबराईं ही उन्होंने जीवन में हार मानी। पेशे से सरकारी टीचर थीं तो उसी दरमियान वह समाज के मूक-बधिर बच्चों से भी मिलीं। उस समय सोच लिया कि इनके लिए कुछ ज्यादा करना है,मगर करें तो क्या यह सवाल मन में घर कर गया। वह अधिकतर समय मूक-बधिर बच्चों के साथ ही गुजारने लगीं और समय के साथ शाेभना से कब शोभा ताई बन गईं उन्हें भी पता नहीं चला।

मन के विचारों ने किया प्रेरित: शोभाताई बताती हैं कि एक दिन वह अपने मुंहबोले भाई यशवंत बझै के साथ बैठी इस विषय पर चर्चा कर रही थीं,तब यशवंतजी ने ताई से कहा कि वह चाहें तो अपना माधौगंज में आंग्रे की गोठ स्थित निवास मूक-बधिर संस्था को दान कर सकती हैं। उन्हें यह अाइडिया जम गया और उन्होंने उस संस्था को अपना घर डोनेट कर दिया।

विवेकानंद आश्रम को भी दिया दान

अच्छेकार्य करने का क्रम शोभा ताई का रुका नहीं है। कुछ समय पहले ही उन्होंने जीवाजीगंज स्थित विवेकानंद आश्रम को एक लाख रुपए दान किए और समय-समय पर भी डोनेशन देती रहती हैं।

बच्चों के बीच जाती हूं तो मेरी खुशी हो जाती है दोगुनी

शोभाताई बताती हैं कि मूक-बधिर बच्चों को खुश देखकर उन्हें बड़ा अच्छा लगता है। वह समय-समय पर मूक-बधिर बच्चों से मिलने स्कूल जाती हैं,लेकिन उस समय उनकी खुशी दो गुनी हो जाती है,जब विशेष अवसरों पर उन्हें विशेष अतिथि के तौर पर अामंत्रित किया जाता है। डॉ. रघुनाथ पापरीकर इस संस्था के मुखिया हैं।

शोभा ताई

मिसाल