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सरकार ने हर साल बदल दी तानसेन की सूरत

7 वर्ष पहले
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नेशनल आर्ट गैलरी में मौजूद तानसेन की प्रामाणिक तस्वीरों में से एक। इसमें वे हाथ जोड़े खड़े हुए हैं। एक और तस्वीर इसी गैलरी में है। उसमें तानसेन अपने गुरु स्वामी हरिदास के सामने बैठे हैं। इसमें अकबर पास ही एक पेड़ की आेट में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

दो में से यह एक तस्वीर है प्रामाणिक

2014

2013

2012

2011

अनदेखी क्यों|प्रख्यात रंगकर्मीऔर नाट्य निदेशक डॉ. कमल वशिष्ठ कहते हैं, ‘यह बड़ी विचित्र बात है कि प्रामाणिक तस्वीरों की इस तरह अनदेखी की जा रही है। और कभी दाढ़ी वाले तो कभी टोपी वाले तानसेन की तस्वीर प्रकाशित की जा रही है।’

2010

रविन्द्र झारखरिया/रवि उपाध्याय|ग्वालियर

हिंदुस्तानीशास्त्रीयसंगीत का प्रतिष्ठित तानसेन समारोह। इस महीने की 12 से 14 तारीख के बीच ग्वालियर में हो रहा है। आमंत्रण पत्र बंट चुके हैं। लेकिन इनमें संगीत सम्राट तानसेन की जो तस्वीर छपी है, वह पिछले साल वाली से अलग है। इस बार दाढ़ी-मूंछ वाली तस्वीर है। पिछले साल सिर्फ मूंछ वाली फोटो चस्पा थी। यह सिलसिला पिछले पांच साल से चल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार आमंत्रण पत्रों पर तानसेन की तस्वीर हर साल बदल देती है।

सरकार की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत-नाटक अकादमी यह समारोह आयोजित करती है। लेकिन इस ‘जिम्मेदार’ अकादमी की ‘संजीदगी’ देखिए। इसे तानसेन की प्रमाणिक तस्वीर का ही इस्तेमाल करने की नहीं सूझी। आमंत्रण पत्र से लेकर मंच और स्मारिका तक में हर साल अलग तस्वीर इस्तेमाल हो रही है। जबकि तानसेन की दो तस्वीरें दिल्ली की नेशनल आर्ट गैलरी में उपलब्ध हैं। दोनों ही प्रामाणिक मानी जाती हैं।