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क्लास में बजाई टेबल तो मिली सजा... और बन गया गायक

7 वर्ष पहले
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बातस्कूल के दिनों की है, मैं मैट्रिक में था। क्लास में बैठा टेबल बजा रहा था, अचानक से टीचर क्लास में आए और मुझसे पूछा तुम क्या कर रहे हो। मैंने कहा सर मैं गाना गा रहा था। उन्होंने आश्चर्य से पूछा क्या...तुमको गाना गाना आता है। मैंने हां में सिर हिलाया। मेरी बात को सुनकर वो कुछ नाराज हो गए। उन्होंने क्लास में ही मुझसे गाने को कहा। मैंने एक साथ तीन गाने गाकर सुनाए। मरी गायकी से प्रभावित होेकर टीचर , मेरे पिताजी से मिले और कहा कि आप अपने बेटे को संगीत की शिक्षा दें, वह एक अच्छा संगीतज्ञ बनेगा। उसके बाद पिताजी ने मुझे गोवा से मुंबई संगीत की शिक्षा के लिए भेजा।

अपने संगीत के सफर की शुरुआत को शेयर किया पंडित प्रभाकर कारेकर ने। पं. कारेकर को 12 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय समारोह के पहले दिन (शुक्रवार) को तानसेन अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। वे गुरुवार को तानसेन समाधि जाएंगे।

मुंबई के प्रख्यात गायक प्रभाकर कारेकर बुधवार को सप|ीक आए।

prabhakar karekar

रियाज सिर्फ मेरी प|ी सुनती है

संगीतके प्रति मेरी प|ी प्रतिभा में उतनी ही श्रृद्धा है जितनी मेरी रियाज के प्रति। यही वजह है कि कई प्रोग्राम में मेरी प|ी मुझे लाइव सुनती है और रियाज को कभी मिस नहीं करती।

पहली बार ग्वालियर में प्रस्तुति का अनुभव कैसा रहा ?

मैंपहली बार ग्वालियर 1981 में तानसेन समारोह में आया। तब पूरी रात की सभाएं होती थीं। जब मेरी प्रस्तुति हुई तो मैंने राग भोपाली से शुरुआत की। संगीत की उस सभा में बैठे श्रोताओं ने मुझे परखने के लिए राग अड़ाना और मालकोश में कुछ प्रस्तुत करने को कहा। संगीत की नगरी में मेरी हुई ली गई इस परीक्षा मैं सफल रहा।

संगीतकी प्रारंभिक शिक्षा किसने दी।

घरमें संगीत का माहौल मिला, पिताजी (जनार्दन कारेकर) शास्त्रीय संगीत में भजन गाते थे। इसलिए प्रारंभिक शिक्षा पिताजी के संरक्षण में गोवा में पूरी की।

आपनेराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति देना कब से शुरू किया।

मैंने1975 से 1980 के दौरान कई छोटे और बड़े प्रोग्राम किए, लेकिन 1980 में पूना में होने वाले सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव से मुझे राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली। इस महोत्सव के दौरान मैंने पंडित भीमसेन जोशी, कुमार गंधर्व जैसे बड़े गायक कलाकारों के साथ प्रस्तुति दी। इसके बाद देश और विदेश की कई यात्राएं की।

तानस