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तैयारी नहीं, सिर्फ गर्मी बढ़ने का इंतजार

6 वर्ष पहले
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यह रही

अंचल

की स्थिति

तापमान बढ़ते ही खुद खुद निष्क्रिय हो जाएगा स्वाइन फ्लू का वायरस।

मेडिकलरिपोर्टर|ग्वालियर

जिलाअस्पताल में दवाओं सुविधाओं का अभाव। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी। जागरूकता अभियान के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई। वैक्सीनेशन की व्यवस्था नहीं। ये ही कारण हैं कि स्वाइन फ्लू विकराल रूप लेता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास इससे निपटने के लिए इंतजाम हैं और कोई योजना। विभाग की तैयारियों को देखकर लगता है कि अफसर स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए मौसम में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि जैसे ही तापमान बढ़ता है स्वाइन फ्लू का वायरस खुद खुद निष्प्रभावी हो जाता है।

35डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर निष्क्रिय हो जाएगा वायरस

संभागके सभी जिला अस्पताल रैफरल यूनिट बनकर रह गए हैं। इससे जेएएच में मरीज क्षमता से अधिक हो गए हैं। जूडा अध्यक्ष डॉ. गिरीश चतुर्वेदी ने बताया स्वाइन फ्लू का वायरस चार से 16 डिग्री तापमान पर सबसे अधिक घातक होता है। 16 से 26 डिग्री तापमान पर असर कम हो जाता है जबकि 35 डिग्री तापमान पर इसका वायरस निष्क्रिय हो जाता है।

सर्दी प्रारंभ होने से पहले हर साल कराएं टीकाकरण

जीआरएमसीमें स्वाइन फ्लू को लेकर सीएमई हुई। डीन डॉ. जीएस पटेल ने जेएएच में हुए इंतजामों और पीएसएम के विभागाध्यक्ष डॉ. एके भागवत ने स्वाइन फ्लू फैलने के बारे में बताया। पीडियाट्रिक के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौड़ ने कहा कि पांच साल से छोटे बच्चे, 65 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और लंबे समय से बीमार चल रहे लोगों को हर साल सर्दी प्रारंभ होने से पहले टीका लगवाना चाहिए।

ओपीडी में डॉक्टर सहित पूरे स्टाफ ने लगाए मास्क

स्वाइनफ्लू के भय से जेएएच में बुधवार को डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ पूरा स्टाफ मास्क लगाए थे। कुछ लोग एन-95 मास्क तो कुछ थ्री लेयर वाले मास्क पहने थे। अस्पताल में भी कुछ मरीज भी मास्क लगाए थे।

डॉक्टरों में भी दहशत

स्वाइनफ्लू की दहशत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ में भी है। कुछ ने तो वैक्सीन भी लगवा लिए हैं तो कुछ ओपीडी में सीनियर डॉक्टर्स से मिलकर इस संबंध में जानकारी ले रहे हैं। जिला अस्पताल और जेएच में चल रहे कोल्ड क्लीनिक में बुधवार को भी मरीज दिखाने पहुंचे।

डॉक्टरों और मेडिको ने कहा- कराया जाए टीकाकरण

सीएमईमें संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बीएस औहरी ने जब पूछा कि कितने लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो अधिकांश ने हामी भरी। डॉ. औहरी ने कहा कि वैक्सीन सिर्फ तीन से चार सप्ताह के बाद असरकारक होती है। इसलिए सावधानी ही सबसे बेहतर उपाय है।

संचालक ने किया निरीक्षण

संचालकस्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बीएस औहरी बुधवार को ग्वालियर आए। इन्होंने सीएमएचओ डॉ. अनूप कम्ठान के साथ जिला अस्पताल मुरार, बिड़ला हॉस्पिटल और जेएएच में स्वाइन फ्लू से निपटने के इंतजामों का निरीक्षण किया। उन्होंने सीएमएचओ को निर्देश दिए कि जागरूकता के लिए शहर में पोस्टर लगवाएं।

एपीडीमियोलॉजिस्ट को नोटिस

स्वाइनफ्लू के तीन मरीज मिलने के बाद प्रतिरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने पर संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. निधि व्यास ने एपीडीमियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। नोटिस में डॉ. अग्रवाल को अपना पक्ष तीन दिन में रखने के लिए कहा गया है।

चार और मरीजों के सैंपल भेजे

स्वाइनफ्लू के चार संदिग्ध मरीजों के सैंपल सीएमएचओ कार्यालय से डीआरडीई भेजे गए हैं। इनमें से दो सैंपल बिड़ला हॉस्पिटल और दो जेएएच से आए हैं। वहीं बीते रोज भेजे गए स्वाइन फ्लू के सैंपल की रिपोर्ट बुधवार को गई। इन मरीजों को जांच में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि नहीं हुई है।

थ्री लेयर मास्क (कीमत12 रुपए)

विशेषता: यहमास्क बैक्टीरिया को रोकने में कारगर है, लेकिन यह स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने के लिए कारगर नहीं है।

एन -95 (कीमत: 120 से 140 रुपए )

विशेषता:यहस्वाइन फ्लू जैसे वायरस को सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।

{प्रदेश सरकार स्वाइन फ्लू को लेकर गंभीर नहीं है?

{सरकार गंभीरहै। स्वाइन फ्लू की स्थिति पर नजर रखने के लिए कमेटी गठित की है। मुख्यमंत्री खुद रोजाना इसकी मॉनीटरिंग करेंगे। उनकी अनुपस्थिति में मैं खुद और मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह निगरानी करेंगे।

{जिलाअस्पतालों में दवाएं हैं और व्यवस्थाएं?

{मास्क दवाएंपहुंचा दी गई हैं। भिंड दतिया में मैंने खुद बात की है। गंभीर मरीजों को ही रैफर किया जाता है। डॉक्टरों से कहा गया है कि जरूरी हो तभी मरीजों को रैफर करें।

{अस्पतालोंमें सैंपल लेने के लिए टेक्नीशियन पैथोलॉजिस्ट नहीं है? जांच कैसे हो पाएगी?

{जिला अस्पतालोंमें सिर्फ सैंपल लिया जा रहा है। जांच की सुविधा सिर्फ ग्वालियर और जबलपुर में है।

{मरीजोंकी शिकायत है कि डॉक्टर सही इलाज नहीं कर रहे?

{ऐसा नहींहै। डॉक्टर काम कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल के संचालकों से भी कहा है संदिग्ध मरीज जिला अस्पतालों में भेजें।

{लापरवाहीबरतने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?

{लापरवाही तोकतई बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

शिवपुरी: स्वाइनफ्लू से जिले में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। एक संदिग्ध मरीज मिला है। मरीजों का सैेंपल लेने वाला स्टाफ नहीं है। जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड तो बना दिया है, लेकिन जब पैथोलॉजिस्ट ही नहीं तो मरीज कैसे चिन्हित होगा..?

दवाओंकी क्या स्थिति- सीएससीएमएचओ दवा पर्याप्त होने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को उपयोग की जरूरत ही नहीं पड़ी।

मुरैना: जिलेमें स्वाइन फ्लू से एक भी मौत नहीं। एक स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मिला है। जिला अस्पताल में टैमी फ्लू की सिर्फ 100 टैबलेट उपलब्ध है।

दतिया: स्वाइनफ्लू से एक भी मौत नहीं हुई है। जिला अस्पतालाें में जांच के लिए 12 किट उपलब्ध हैं। जिला मुख्यालय पर सौ टैबलेट हैं।

भिंड : स्वाइनफ्लू से जिले में एक महिला की मौत हो चुकी है। जांच में दो अन्य मरीजों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। तीन मरीजों का सैंपल भेजा गया है। जिला अस्पताल में मास्क दवाओं की कमी है। भोपाल जबलपुर से टैमी फ्लू मंगाई गई है।

सरकार गंभीर है, मुख्यमंत्री खुद करेंगे मॉनीटरिंग नरोत्तम मिश्रा, स्वास्थ्य मंत्री

अंचल में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। इसका डर सभी को है। बुधवार को जब जेएएच में डॉक्टरों की टीम निरीक्षण के लिए निकली तो सभी मास्क लगाए नजर आए। फोटो:भास्कर