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अफसरों ने माना तिघरा में मई तक का पानी

6 वर्ष पहले
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बड़ा सवाल

जा कहां रहा है पानी?

शहरमें पेयजल सप्लाई का एकमात्र स्रोत तिघरा जलाशय केवल मई तक हमारा साथ दे पाएगा। तिघरा के लगातार गिरते जल स्तर को लेकर अब प्रशासनिक अफसरों को चिंता सताने लगी है। अफसरों का कहना है कि मई के बाद ककैटो पेहसारी से पंपिंग कर पानी लाना पड़ेगा। इसको लेकर गुरुवार को महापौर विवेक शेजवलकर की अध्यक्षता में बाल भवन में बैठक आयोजित की गई। इसमें कलेक्टर पी नरहरि, नगर निगम कमिश्नर अजय गुप्ता, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता पीएचई के अफसर मौजूद थे।

मानसून की आमद में देरी होने पर शहर में पेयजल संकट पैदा हो सकता है। याद रहे दैनिक भास्कर ने इसकी चेतावनी पहले ही दे दी थी। शहर में पेयजल की आवश्यकता और तिघरा में पानी की उपलब्धता के आधार पर भास्कर ने बताया था कि मई माह तक ही तिघरा से सप्लाई हो सकेगी। इसके बाद चेते प्रशासन ने गुरुवार को बैठक का आयोजन किया।

भास्कर में 31 जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर।

तिघरा का वर्तमान जलस्तर 727.45 फीट

कलेक्टरपी नरहरि ने पीएचई के अफसरों से तिघरा बांध के जलस्तर की जानकारी ली। पीएचई के अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य ने बताया कि तिघरा का वर्तमान जल स्तर 727.45 फीट एवं पानी की क्षमता 2058 एमसीएफटी है। इसमें शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए 1800 एमसीएफटी पानी का उपयोग किया जाता है।

मॉनीटरिंगका अभाव

पेयजलसप्लाई के दौरान पीएचई के तकनीकी अमले को फील्ड में रहना चाहिए। लेकिन फील्ड का अमला इन सब निर्देशों की अनदेखी करता है। इस कारण वाल्व प्रॉपर ऑपरेट नहीं होते और उन क्षेत्रों में भी पानी की सप्लाई होती है, जहां नहीं होना चाहिए। पेयजल सप्लाई की अव्यवस्थाओं का खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

मौसम बदलने के बाद संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए आयोजित बैठक का सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि सप्लाई के लिए निगम तिघरा से रोजाना 8 एमसीएफटी पानी ले रहा है। इतने ही पानी में पिछले साल रेगुलर सप्लाई हो रही थी। इरीगेशन के अफसरों का कहना था कि यदि सप्लाई एक दिन छोड़कर हो रही है, तो तिघरा से रोजाना लिए जाने वाले पानी की मात्रा भी कम होना चाहिए थी। पीएचई के अफसर इसका जवाब नहीं दे पाए।