पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सड़कों पर आवारा जानवर देख हुए हैरान

सड़कों पर आवारा जानवर देख हुए हैरान

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बुनियादी सुविधाओं के लिए 10 में से दिए औसत 4.5 नंबर

शहर सरकार को चाहिए समानता आैर अधिकार

अरे,यहां तो बीच सड़क पर सांड़ बैठे हैं। इनकी जगह नंदी हाउस में होनी चाहिए। हमारे यहां तो इन्हें नंदी हाउस में ही रखा जाता है। यह बात गाजियाबाद के महापौर तेलूराम कंबोज ने शनिवार को ग्वालियर की सड़कों का नजारा देखने के बाद कही। महापौर परिषद की कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के लिए विभिन्न प्रदेशों से आए सदस्यों में से हमने चुनिंदा महापौर से ग्वालियर शहर के पांच बुनियादी मुद्दों साफ-सफाई, सड़क, ट्रैफिक, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण को लेकर उनका नजरिया जानना चाहा। हमने हर मुद्दे के लिए दोे अंक तय कर शहर की स्थित का आकलन करने को आग्रह किया। उन्होंने सड़कों पर आवारा जानवरों जहां-तहां दिख रहे गड्ढों को लेकर हैरानी जताने के साथ सिर्फ 50 फीसदी अंक दिए। जबकि सफाई व्यवस्था के लिए सौ फीसदी अंक देते हुए स्थिति संतोषजनक बताई। ट्रैफिक,स्ट्रीट लाइट आैर अतिक्रमण के मामले में भी शहर को 50 फीसदी ही अंक मिले।

Áसड़कोंके बीच बैठे मवेशी गड्ढे चिंताजनक: गाजियाबादके महापौर तेलूराम कंबोज रेसकोर्स रोड, पड़ाव, जयेंद्रगंज होते हुए सिकंदर कंपू पहुंचे। यहां रेसकोर्स रोड पर सड़क के बीच सड़क पर बैठे मिले। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में सांड़ों के लिए नंदी हाउस बनाया गया है। सड़क पर एक भी सांड़ देखने को नहीं मिलेगा।

Áसड़कआैर सफाई की कमी: ग्वालियरऐतिहासिक नगर है। जितना विकास यहां होना चाहिए उतना नहीं हो सका। यह कहना है कि इंदौर के महापौर कृष्ण मुरारी मोघे का। उन्होंने कहा किसी भी शहर के विकास में जनता की भागीदारी जरूरी है।

Áगड्ढोंके ऊपर से आना पड़ा : झांसीसे ग्वालियर आने के लिए गड्ढों के ऊपर से निकलना पड़ा। सड़कों की हालत बहुत खराब है। यह कहना है कि झांसी की महापौर किरण वर्मा का। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे मवेशी दिखे। इन्हें हटाना जरूरी है।

Áसड़कोंकी दशा सुधारने की जरूरत : ग्वालियरबहुत सुंदर शहर है। यहां कई ऐतिहासिक इमारतें है। लेकिन सड़क और सफाई व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। यह कहना है गुलबर्ग (कर्नाटक) की महापौर अल्या शिरिन का।

नंदी हाउस की व्यवस्था करेंगे, सड़कें होंगी बेहतर

^बारिशके चलते डामर प्लांट बंद था, इसलिए सड़कों का काम शुरू नहीं हो पाया। प्लांट शुरू होते ही चेतकपुरी से महलगेट तक