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‘जलवायु में हो रहे परिवर्तन को मिलकर रोकना होगा’

7 वर्ष पहले
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जेयू के जूलॉजी विभाग में आयोजित व्याख्यान माला में सीसीएस यूनिवर्सिटी की प्रो. विमला वाय ने कहा-

आज जलवायु में तेजी से बदलाव हो रहा हैं। सौ सालों में होने वाला यह बदलाव दस से बीस सालों में ही हो रहा है। यह संकेत भविष्य के लिए ठीक नहीं है। ओजोन परत को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है। क्लोरोफ्लोरो कार्बन, ब्रोमोक्लोराइड सहित कई इसके कारण है। एसी और रेफ्रिजरेटर का बढ़ता उपयोग परेशानी बन रहा है। इसके विकल्प को तलाश कर हमें प्रयास करने होंगे। शनिवार को यह बात सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ की प्रो. विमला वाय ने कही। वे जीवाजी यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग में आयोजित व्याख्यानमाला को बतौर वक्ता संबोधित कर रहीं थी।

जीवाजी यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के सभागार में आयोजित लेक्चर सीरीज का शुभारंभ मुख्य अतिथि जीवाजी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. संगीता शुक्ला ने किया। इस अवसर पर प्रो. विमला वाय ने पहला लेक्चर ओजोन लेयर, प्रोटेक्शन और प्रोटेक्शन नीड्स पर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल ने ब्रेकिंग एनर्जी को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करने का फार्मूला पेटेंट कराया है,यह दुनिया में दिल्ली मेट्रो के पास ही है। कार्बन एमिशन को लेकर सभी देश चिंतित हैं। कार्यक्रम में संयोजक प्रो. रेखा भदौरिया, सह संयोजक एसके गुप्ता, प्रो अविनाश तिवारी, प्रो एसएन महापात्रा उपस्थित थे।

उपग्रह बताता है जलसंसाधन

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग देहरादून के एफआईई हेड डॉ एसपी अग्रवाल ने रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस एप्लीकेशन टू वाटर रिसोर्सेस पर अपना लेक्चर दिया। उन्होंने कहा कि सुदूर संवेदन से धरती पर जल संसाधनों के बारे में पता लगाया जा सकता है। उपग्रह जो भी चित्र भेजते हैं उनका अध्ययन करने के बाद गणना की जाती है। धरती पर पानी, पेड़, खेती, जंगल सहित सभी का पता लग जाता है।