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कूनो अभयारण्य में गूंजेगी एशियाई शेरों की दहाड़

6 वर्ष पहले
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{ गुजरात से लाए जाएंगे शेर।

{ वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञों ने कूनो अभयारण्य को शेरों के लिए अनुकूल पाया।

सिटीरिपोर्टर | ग्वालियर

श्योपुर स्थित कूनो अभयारण्य में अब जल्द ही शेरों की दहाड़ गूंजेगी। अब तक इस अभयारण्य में एक भी शेर नहीं है। बाघ, तेंदुओं के अलावा अब यहां गुजरात से आए शेर भी देखने को मिलेंगे। शेरों को लाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही कूनो अभयारण्य का दायरा बढ़ाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञों ने कूनो अभयारण्य को शेरों के लिए अनुकूल पाया है। यह बात प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनिल ओबराय ने चर्चा के दौरान कही।

श्री ओबराय ने बताया कि अभी अभयारण्य में रणथंबौर से लाया गया बाघ ही लंबे समय से है। अभयारण्य में तेंदुओं के फुटेज भी मिले हैं। राज्य सरकार ने कूनो अभयारण्य का इलाका बढ़ाने की अनुमति भी दे दी है। गौरतलब है कि पहले यहां पर अफ्रीकी चीता लाने की प्लानिंग थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन विभाग ने इस परियोजना को अभी रोक दिया है। ताकि गिर से आने वाले शेरों को कोई बाधा आए। भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों ने साबित कर दिया है कि गिर के बाद पालपुर-कूनो के जंगल एशियाई शेरों के रहने के लिए सबसे मुफीद स्थान हैं। इसके पक्ष में विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि गिर में वन क्षेत्र सीमित है लिहाजा शेरों की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त क्षेत्र होना जरूरी है।

इससे पहले श्री ओबराय ने तपोवन, कैंसर पहाड़िया आदि क्षेत्रों का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार, मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ विश्राम सागर शर्मा, मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान ओपी चौधरी और डीएफओ अतुल खेड़ा उपस्थित थे।

1981 में बना था कूनो अभयारण्य

कूनोके जंगलों को 1981 में वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। हाल ही में इसमें 900 वर्ग किमी वन क्षेत्र और जोड़ा गया है। अब यह क्षेत्र गिर के जंगलों से शेरों के विस्थापन और प्रजनन के लिए पूरी तरह उपयुक्त मान लिया गया है। इस जंगल में शेर के शिकार के लिए पर्याप्त जानवर हैं। इनमें नीलगाय, हिरण, लोमड़ी आदि शामिल हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनिल ओबराय