जेएएच में बना कोल्ड क्लीनिक
कोल्ड क्लीनिक में सुबह 9 से दोपहर 1.30 बजे तक बैठेंगे मेडिसिन, ईएनटी पीडियाट्रिक डॉक्टर।
मेडिकलरिपोर्टर|ग्वालियर
abhishek70dev@rediffmail.com
स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जेएएच की ओपीडी के कमरा नंबर नौ में कोल्ड क्लीनिक चलाई जाएगी। इस क्लीनिक में मेडिसिन, ईएनटी और पीडियाट्रिक के डॉक्टर सुबह नौ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक बैठेंगे। क्लीनिक सोमवार से ही शुरू होगी। इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। यह निर्णय जीआरएमसी के डीन डॉ.जीएस पटेल की स्वास्थ्य विभाग की संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. निधि व्यास, सीएमएचओ डॉ. अनूप कम्ठान के साथ शनिवार को हुई बैठक में लिया गया। बैठक में कहा गया कि मरीजों का इलाज शासन द्वारा निर्धारित गाइड लाइन से किया जाए। मरीज का परीक्षण कर यह देखा जाए कि उसका स्वाइन फ्लू का टेस्ट किया जाना है या उसे दवा देनी है। स्वाइन फ्लू के मरीज को बाहर रैफर एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम युक्त एंबुलेंस में ही किया जाए। डीन ने कहा है कि सोमवार से स्वाइन फ्लू की विशेष ओपीडी शुरू हो जाएगी।
वैक्सीनकी क्षमता की जांच के लिए बनाई कमेटी: जूनियरऔर सीनियर डॉक्टरों द्वारा स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए वैक्सीन की मांग की जा रही है। इसके लिए डीन ने मेडिसिन, पीडियाट्रिक और पीएसएम के विभागाध्यक्षों के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी वैक्सीन की कारगर क्षमता की जांच करेगी। रिपोर्ट के बाद वैक्सीन लगाई जाए या नहीं, निर्णय लिया जाएगा।
1. यहहवा में फैलने वाला वायरल है।
2.एच1एन1 वायरस सूअरों में पनपता है। मनुष्य के संपर्क में आने पर उनमें भी फैल जाता है।
3.स्वाइनफ्लू से पीड़ित चार व्यक्तियों में से एक की मौत हो जाती है।
4.इसकेशुरुआती लक्षण सामान्य बुखार की तरह होते हैं, खांसी, जुखाम, बुखार आिद।
5.धीरे-धीरेये लक्षण गंभीर होते जाते हैं और ऐसे मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
6.यहएक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। खांसने या उसके इस्तेमाल किए गए रुमाल आिद का उपयोग करने पर।
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मौत स्वाइन फ्लू से अभी तक मप्र में
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मौतें अंचल में। ग्वालियर में 1 शिवपुरी में 1 श्योपुर में 1
161 लोगों ने कराया चेकअप
प्रदेशमें फैल रहे स्वाइन फ्लू को लेकर शहर के लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है। जिला अस्पताल मुरार में चार दिन में सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार के 161 मरीजों ने डॉक्टरों से अपना चेकअप कराया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमएचओ से पीपी किट और दवाइयां मांगी हैं। अभी टेमी फ्लू की दो सौ गोलियां उनके पास हैं। इसके अलावा एम-95 हैं, 50 मास्क अौर मांगे गए हैं।
पीपी किट और दवा मांगी
जेएएचप्रशासन ने स्वाइन फ्लू वार्ड के लिए सीएमएचओ से मरीज का इलाज करते समय पहनी जाने वाली पांच पीपी किट, टेमी फ्लू की दवा एम-95 के मास्क मांगे हैं। जेएएच में अभी टेमी फ्लू की 300 गोलियां हैं। सीएमएचओ ने 100 गोलियां और दे दी हैं। इसके अलावा और गोलियां भिजवाई जाएंगी। जेएएच प्रशासन ने एक हजार ट्रिपल लेयर के मास्क खरीद लिए हैं। अभी जेएएच में दस पीपी किट, एम -95 के 150 मास्क मौजूद हैं। डीन ने एक वेंटीलेटर और स्वाइन फ्लू वार्ड के लिए दिया है।
कमेटी ने देखी अर्चना की रिपोर्ट
अर्चनाभदौरिया की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए डीन डॉ. पटेल की अध्यक्षता में गठित की गई डेथ ऑडिट कमेटी ने इलाज के दौरान तैयार की गई रिपोर्ट को देखा। गर्भवती होने के कारण अर्चना हाई रिस्क पर थीं इसलिए स्वाइन फ्लू के कारण ही संभवत: मौत हुई होगी। इस मामले में पीएसएम विभाग की भी राय ली जा रही है।
तीनकी हालत सुधरी, एक दिल्ली रैफर
स्वाइनफ्लू पीड़ित सुमन, काजल और डॉ. जितेंद्र की हालत में सुधार है। काजल को रविवार को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उधर जेएएच के स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती माधौगंज निवासी प्रवेश फाल्के के परिजन उन्हें रैफर करवाकर दिल्ली ले गए हैं।
तीनडॉक्टर सहित छह के सैंपल भेजे
एकजूनियर डॉक्टर को स्वाइन फ्लू पाॅजिटिव होने के बाद जूनियर डॉक्टरों में डर व्याप्त है। सुमन के इलाज में लगे तीन और जूनियर डॉक्टरों ने अपने सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। इसके अलावा तीन सैंपल बिड़ला हॉस्पिटल से भेजे गए हैं। अब तक सीएमएचओ कार्यालय के माध्यम से 19 मरीजों के सैंपल भेजे गए हैं। जिनमें ग्वालियर के पांच, शिवपुरी और धौलपुर के एक-एक मरीज को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है।
खांसी,जुकाम या हल्का फीवर है तो अभिभावक बच्चों को भेजें स्कूल
डीईओमोहर सिंह सिकरवार का कहना है कि प्रदेश में बढ़ते स्वाइन फ्लू को लेकर स्कूलों को भी अलर्ट किया जाएगा। कलेक्टर से चर्चा करने के बाद स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र भेजकर कहा जाएगा कि यदि किसी बच्चे को जुकाम, खांसी हल्का फीवर की शिकायत है तो उन्हें स्कूल से तुरंत छुट़्टी दे दें। अभिभावक भी ऐसे बच्चों को स्कूल नहीं भेजें जिन्हें जुकाम, खांसी की शिकायत है। अभिभावक बच्चों को अस्पताल ले जाएं।
मुंह ढंककर रखें (मास्क पहनें)
शुरुआतीलक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें।
बिनाडॉक्टर की सलाह के दवाएं लें।
दवाका पूरा कोर्स करें। बीच में दवा छोड़ें।