मंत्रालय और कलेक्टर के आदेश को नजर अंदाज कर स्थानीय तेल कंपनियों के अफसरों ने दो कदम आैर आगे जाकर खाता लिंक कराने वाले ग्राहकों की सप्लाई अभी से बंद करवा दी है। एलपीजी एजेंसियों के संचालक भी इसे दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 31 मार्च के बाद भी तीन माह का पार्किंग पीरियड पेट्रोलियम मंत्रालय ने तय किया है। इन नब्बे दिनों में सब्सिडी तभी मिलेगी जबकि उपभोक्ता का खाता लिंक होगा।
तेल कंपनियों की एलपीजी ग्राहकों के साथ मनमानी चरम पर है। जो खाता लिंक करा चुके हैं वे सब्सिडी मिलने से और जिन्होंने खाता लिंक नहीं कराया है वे सिलेंडर मिलने से परेशान हैं। तेल कंपनियों के अफसर खुद को डीबीटीएल में इतना व्यस्त बता रहे हैं कि उन्हें उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे तक के लिए समय नहीं है। परिणामस्वरूप अब गैस एजेंसी संचालक भी तेल कंपनियों के अधिकारियों की राह पर ही चल पड़े हैं।
एजेंसी कर्मचारी बोले- जिनका खाता लिंक, उन्हें ही देंगे सिलेंडरमेरा हिमांशु गैस एजेंसी नई सड़क पर कनेक्शन है। वहां एलपीजी की बुकिंग करवाने गया था। पहले तो यह कहा गया कि पांच छह दिन में डिलीवरी हो जाएगी। छह दिन में जब डिलीवरी नहीं हुई तो गैस एजेंसी पर जाकर पड़ताल की। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि तेल कंपनी के अधिकारियों के आदेश आए हैं कि जिन कनेक्शन धारकों के खाते लिंक हुए हैं उन्हें ही डिलीवरी दी जाए। अन्य कनेक्शन धारकों को नहीं ।'
दीपकगुप्ता, उपभोक्तासहकारी बैंक में लिंक है खाता, पर मान्य करने से किया मनामेरा चिटनिस की गोठ स्थित दीवान इंडेन पर एलपीजी कनेक्शन क्रमांक 10212 है। 25 जनवरी को नंबर लगाया था, डिलीवरी अभी तक नहीं हुई है। मेरा खाता नागरिक सहकारी बैंक नया बाजार में है, इसी के जरिए मैंने खाता लिंक करवाया था। डिलीवरी नहीं होने का कारण पूछा तो बताया कि इस बैंक का खाता मान्य नहीं होगा। पहले सरकारी बैंक में खाता खुलवाकर लिंक करवाओ उसी के बाद एलपीजी सिलेंडर मिलेगा।'
प्रदीपगौड़, उपभोक्ताउपभोक्ता कॉल करते हैं तो तेल कंपनी के अफसर रिसीव नहीं करतेतीनोंतेल कंपनियों के एलपीजी ग्राहक इन दिनों परेशान हैं पर तेल कंपनियों के अफसरों को उनकी कोई चिंता नहीं है। ग्राहक जब अफसरों के
मोबाइल पर फोन लगाते हैं तो अफसर फोन नहीं उठाते। उठाते भी हैं तो वे अपने को दूसरी कंपनी का अफसर बताकर फोन काट देते हैं।
कुछ ग्राहकों ने यह भी शिकायत की है कि वे इंडेन के दफ्तर गए पर अफसर मिले नहीं। मसलन इंडेन के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक एनके श्रीवास्तव कार्यालय समय में फोन उठाते नहीं हैं और जब कार्यालय का समय खत्म हो जाता है तो वे समय खत्म होने का हवाला देकर दूसरे दिन बात करने की बात कहने लगते हैं।