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ऐसा कोई ईश्वर नहीं जो पाप को पुण्य में बदल दे: पुलक सागर
तुमकार्य तो पाप के करते हो और यहां आकर पुण्य के फल की आकांक्षा रखते हो। मैं समझता हूं कि ऐसा कोई ईश्वर नहीं है जो तुम्हारे पाप को पुण्य में बदल दे। अरे नादानों, तुम नीम का पेड़ लगाओगे तो फल के रूप में आम कैसे मिलेंगे? आम को पाने के लिए तुम्हें आम का ही पेड़ लगाना पड़ेगा। पूजा पाठ करने से पाप कर्म पुण्य में नहीं बदल सकते। यह विचार राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर ने सोमवार को जैन छात्रावास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि एक युवक को क्लीनिक खोलना है, डॉक्टर बनना है और वह जीवन भर कॉमर्स पढ़ता रहे तो क्या वह डॉक्टर बन पाएगा। ऐसे ही सुख पाना है तो कर्म भी अच्छे करने होंगे। प्रकृति का नियम है कि यहां जो दोगे, वही लौट कर मिलेगा। आज इंसान काम तो गलत करता है फिर भगवान और साधुओं के द्वार पर जाकर पुण्य फल मांगता है। संसार में तुम्हारे पाप को पुण्य में कोई नहीं बदल सकता।