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हेलमेट नहीं लगाया तो स्टूडेंट्स को एक अक्टूबर से स्कूल में \"नो एंट्री\'
यदिआप सीबीएसई स्कूल या फिर केंद्रीय विद्यालय में पढ़ते हैं और अपनी गाड़ी से स्कूल जाते हैं, तो आपको एक अक्टूबर से हेलमेल लगाकर स्कूल जाना होगा। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको स्कूल में एंट्री नहीं मिलेगी। साथ ही आपके पैरेंट्स को स्कूल प्रशासन फोन कर पूरी घटना से अवगत कराएंगे। इसके पीछे स्कूल प्रशासन की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स ट्रैफिक रूल्स को फॉलो करें। हाल ही में ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने शहर के प्रमुख चौराहों पर चेकिंग अभियान चलाया था। इसमें सबसे ज्यादा एेसे स्टूडेंट्स बिना हेलमेट के पकड़े गए थे, जो कि या तो कॉलेजगाेइंग स्टूडेंट्स थे या फिर स्कूल में नवीं से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट्स।
9वींसे 12वीं के स्टूडेंट्स पर रहेगा फोकस
शहरमें 40 सीबीएसई और पांच केन्द्रीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें क्लास नौवीं से लेकर 12वीं तक में लगभग बीस हजार से अधिक स्टूडेंट्स है। इनमें से चालीस प्रतिशत ऐसे स्टूडेंट्स हैं जो कि खुद के व्हीकल से आते हैं, जबकि शेष अपने व्हीकल से आते हैं।
25% हेलमेट में नकली हॉलमार्क
Á 80 प्रतिशत लोग स्टैंडर्ड हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
Á25 प्रतिशत हेलमेट में नकली हॉलमार्क।
Á250 रुपए लगभग नकली हेलमेट की कीमत।
Á750 रु. लगभग असली हेलमेट की कीमत।
नकली हेलमेट अक्सर एक्सीडेंट में टूट जाता है
Áदुर्घटना के वक्त इन हेलमेेट के टूटने का खतरा बना रहता है।
Áहेलमेट के फिट नहीं बैठने की प्रॉब्लम हमेशा फेस करनी होती है।
Áन्यूरो श्रवण संबंधी हो सकती है बीमारी
Áगाड़ी में चलते समय हेलमेट दूसरी ओर मुडनें पर दुर्घटना का खतरा
हेलमेट का मतलब दिखावा नहीं समझें
ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई को देखकर लोगों ने हेलमेट खरीदना शुरू कर दिया है, लेकिन ज्यादातर लोग कीमत के चक्कर में क्वालिटी से समझौता कर रहे हैं। हेलमेट लगाने का उद्देश्य सिर्फ दिखावा नहीं होना चाहिए। आईएसआई मार्का का हेलमेट लेंगे, तो दुर्घटना होने पर सुरक्षा भी आपको ही मिलेगी।
चार कसौटी पर परखा जाता है हेलमेट
Âकंडीशनिंग टेस्ट: हेलमेटको 50 डिग्री के तापमान पर चार घंटे के लिए रखा जाता है और फिर इतने ही समय माइनस 20 डिग्री के पर।
Âअल्ट्रावायलेट रेडिएशनचैक : 48घंटे तक 125 वाट के जिनोफाइड लैंप की रोशनी में रखा जाता है।
Âनमी कापरीक्षण :