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इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज, स्वास्थ्य की ये कैसी गारंटी

7 वर्ष पहले
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शिवपुरी. पूरे देश में सबसे पहले अपने नागरिकों को स्वास्थ्य की गारंटी देने का दावा करने वाली मप्र सरकार इस योजना के अमल को लेकर कितनी संजीदा है, इसकी हकीकत का अंदाजा शिवपुरी जिले के ग्रामीण इलाकों के हालात देखकर लगाया जा सकता है।
नरवर तहसील के झंडा गांव में बीमारी से नौ मौतों के बाद सोमवार की रात पिछोर के नाद व नयागांव में भी बुखार से दो लोगों ने दम तोड़ दिया। बीमार ग्रामीण नरवर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाने की बजाय झोलाछाप डॉक्टरों से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं, क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र पर न तो डॉक्टर मिलते हैं न प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ।
जांच और दवाएं सब मुफ्त
देश में मप्र ऐसा पहला राज्य है, जो मरीजों के स्वास्थ्य की गारंटी लेता है। रोजाना पचास लाख मरीजों को नि:शुल्क दवा और पैथोलॉजी जांच की सुविधा मिल रही है। प्रदेश सरकार का दावा कि सरकारी अस्पतालों में हर मरीज को देखभाल और प्यार के साथ समय पर निशुल्क इलाज मिल रहा है।
न डॉक्टर, न स्टाफ

झंडा गांव में बीमारी से नौ मौतें हो गईं। चार ने इलाज के अभाव में दम तोड़ा। दो सौ से अधिक मरीजों को ग्वालियर, झांसी, शिवपुरी में भर्ती कराया गया। जबकि झंडा गांव के सबसे नजदीकी नरवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई मरीज भर्ती ही नहीं हुआ। जांच तक नहीं हो पा रहीं। क्योंकि न तो डॉक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
झोला छाप डॉक्टरों से इलाज
सरकारी अस्पतालों में इलाज न होने पर लोगों को अपने खर्च पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। खडीचा के भरत रावत व उसके तीनों बच्चों ने जब नरवर के निजी क्लीनिक पर इलाज कराया तो चारों को मलेरिया पॉजिटिव निकला। यदि किसी की ज्यादा तबीयत खराब हो जाए तो उसे अपने खर्चे पर एंबुलेंस बुलाना पड़ती है।