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PHOTOS: सड़कों पर छलकते हैं जाम, बच्चों को परोसी जा रही हैं शराब

6 वर्ष पहले
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ग्वालियर. शहर के मुख्य मार्ग और कुछ पॉश कॉलोनियों की सड़कें शाम होते ही मयखानों में तब्दील हो जाती हैं। सिटी सेंटर, बलवंत नगर, मयूर मार्केट व हरीशंकरपुरम जैसे पॉश इलाके हों या फिर कम्पू, जिंसी नाला और फूलबाग के व्यस्ततम मुख्य मार्ग, इन सभी इलाकों में शाम सात बजे के बाद शराबियों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है। अंडे के ठेलों से लेकर बीड़ी-सिगरेट की छोटी दुकानों पर कई शराबी जाम से जाम टकराते हुए नजर आते हैं।
नाबालिगों को भी शराब बेच रहे हैं दुकानदार
नियमानुसार कोई भी तंबाकू उत्पाद और शराब 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं बेची जा सकती है, लेकिन धंधे की जुगाड़ में दुकानदार बच्चों को भी शराब बेच रहे हैं। पड़ताल के दौरान टीम ने देखा कि थाटीपुर स्थित दुकान पर एक आठ साल का बच्चा शराब खरीदने के लिए पहुंचा। दुकानदार ने पैसे लेकर उसे बोतल दे दी।
दुकान से शराब खरीदने के बाद सार्वजनिक स्थानों पर उसका सेवन करने पर दो हजार रुपए तक जुर्माना तथा जेल भेजने का प्रावधान होने के बाद भी लोग सड़कों और शराब की दुकानों पर खुलेआम शराब पीते हैं। नशे में ये लोग महिलाओं पर अश्लील कमेंट करने से भी बाज नहीं आते।
डीबी स्टार टीम ने शनिवार को शहर की कुछ शराब की दुकानों पर नजर रखी। थाटीपुर स्थित शराब की दुकान पर भीड़ लगी रही और कई लोगों ने वाइन की बोतल खोलकर वहीं पीना शुरू कर दिया। इसके बाद टीम नाका चंद्रवदनी पहुंची।
यहां से कलेक्टोरेट तक बनाई गई सड़क के किनारे तथा दुकानों पर लोग शराब पी रहे थे। इसके अलावा कम्पू स्थित शराब की दुकान के बगल में ही मौजूद एक चाय की दुकान पर भी शराबखोरी चल रही थी। जिंसी नाला पर नवरत्न होटल के बगल में मौजूद शराब की दुकान पर भी नशेड़ी खड़े होकर शराब पीते मिले।
ये एरिया बन जाते हैं ओपन बार
- सिटी सेंटर में व्हाइट हाउस के आसपास लोग कारों में शराबखोरी करते हैं।
- मयूर मार्केट में मौजूद शराब दुकान के अलावा चाट-पकौड़ी के ठेलों पर लोग शराब पीते हैं।
- नाका चंद्रवदनी से कलेक्टोरेट तक बनाई गई सड़क पर भी लोग शराबखोरी करते नजर आते हैं।
- रूपसिंह स्टेडियम रोड पर नगर निगम कमिश्नर के बंगले के पास लोग शहीद कैप्टन उपमन्यु सिंह की स्मृति में विकसित किए गए पार्क में शराब पीकर बोतलें फेंक देते हैं। इसकी कई बार शिकायत भी हो चुकी है।
शराबियों को तो अब शहीदों के सम्मान का भी ध्यान नहीं रहा
मेरे बेटे की स्मृति में बनाए गए शहीद उपमन्यू सिंह पार्क में शराबी खाली बोतलें फेंक जाते हैं। मैं व मेरा छोटा बेटा वहां जाकर साफ-सफाई करते हैं। मैंने अपने खर्चे पर वहां माली लगा रखा है, जो देखभाल करता है। मैंने जब इस मामले में पुलिस व निगम अफसरों से शिकायत की थी, तो उन्होंने ठेलों को हटवा दिया, लेकिन समस्या जस की तस है। शराबियों को शहीदों का भी सम्मान नहीं है।
सुमन सिंह, शहीद कैप्टन उपमन्यु सिंह की मां
छह माह की सजा और तीन हजार रुपए तक जुर्माना
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शराब या तंबाकू बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश भी जारी किया है, जिसमें कानून तोड़ने की स्थिति में दुकानदार को तीन से छह माह की सजा और तीन हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का प्राप्त होता है राजस्व
आबकारी विभाग को प्रदेश भर में शराब की बिक्री से पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व प्राप्त होता है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में जहां विभाग को 5083.19 करोड़ रुपए का राजस्व मिला, तो वित्तीय वर्ष 2013-14 में 5908.05 करोड़ रुपए के राजस्व की प्राप्ति हुई थी।
साल भर में 50 से भी कम चालान
सड़क किनारे खड़े होकर शराब पीने वालों पर थाना पुलिस कार्रवाई नहीं करती, वहीं शराब पीकर वाहन चलाने वालों को ट्रैफिक पुलिस नजरअंदाज कर देती है। पिछले एक साल में ट्रैफिक पुलिस ने 50 से भी कम शराबियों पर केस बनाए हैं।
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