ग्वालियर. श्राद्धपक्ष में पुरखों के लिए तर्पण हो या अस्थि विसर्जन से लेकर गया (बिहार) में किया जाने वाला
पिंडदान। आर्थिक रूप से कमजोर और क्रियाकर्म की पद्धति से अनजान लोगों के सहयोग के लिए शहर के कुछ लोगों ने अनूठा अभियान चला रखा है। इसके तहत ये लोग उन अनजान लोगों की अस्थियों के विसर्जन से लेकर पिंडदान करने का काम भी अपने खर्च से कराते हैं, जिनका कोई नहीं है।
हर वर्ष श्राद्धपक्ष में चलने वाले इन कार्यक्रमों से जुड़ने वालों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। जबकि इनकी शुरुआत व्यक्तिगत स्तर पर हुई थी। खास बात यह है कि इन कार्यक्रमों के सूत्रधारों में कोई कॉलेज में प्रोफेसर है तो कोई यूनिवर्सिटी में मुलाजिम या व्यापारी।
लावारिसों का अंतिम संस्कार कराता है न्यास: अचलेश्वर मंदिर का न्यास दस साल से लावारिस मरने वालों का अंतिम संस्कार करवाता है। न्यास के पूर्व सचिव राजीव चड्ढा के मुताबिक न्यास मृतकों की अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार और इलाहाबाद में कराता है, वह भी नि:शुल्क।
हरिद्वार में कराते हैं अस्थि विसर्जन: बहोड़ापुर स्थित महालक्ष्मी पीठ के प्रमुख लखमीचंद्र शर्मा (65 वर्ष)लावारिस आैर गरीब लोगों की मृत्यु पर उनकी अस्थियों को विसर्जन के लिए हरिद्वार पहुंचाते हैं। पेशे से फोटोग्राफर रहे श्री शर्मा के परिवार में उनकी एक बेटी और पत्नी थी। बेटी का
विवाह हो चुका है और पत्नी का निधन। पत्नी के निधन के बाद से उन्होंने खुद को इस कार्य के लिए समर्पित कर दिया। छह साल से वे लावारिस लोगों की अस्थियों का संचय कर उन्हें हरिद्वार पहुंचाते हैं।
गया ले जाकर कराते हैं पिंडदान : हिंदू परंपराओं में पितरों के मोक्ष के लिए गया में तर्पण और पिंडदान की मान्यता है। कुछ लोग आर्थिकतंगी के चलते इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसी ही लोगों की मदद का संकल्प सिंधु सारस्वत ब्राह्मण मंडल ने उठाया है। मंडल से जुड़े और जीवाजी यूनिवर्सिटी में पदस्थ पं. सुनील शर्मा कहते हैं - मंडल हर साल जरूरतमंद लोगों को पिंडदान कराने के लिए गया लेकर जाता है। इस वर्ष 85 लोगों को गया ले जाया जा रहा है।
मुक्तिधाम में सुंदरकांड : श्मशान घाट में लोग किसी के अंतिम संस्कार के समय ही जाते हैं। लेकिन कुछ लोग लक्ष्मीगंज श्मशान में पिछले 17 साल से हर वर्ष पितृपक्ष में सुंदरकांड का पाठ कराते हैं। समाजसेवी रामचंद्र राव भोयटे (अब स्वर्गीय) ने इसकी शुरुआत कराई थी। तब से हर साल यह कार्यक्रम होता है। तारागंज स्थित टेकरी वाले हनुमान मंदिर महारुद्र सेवा मंडल के सदस्य गुड्डू बघेल कहते हैं पितरों की शांति के लिए सुंदरकांड का पाठ कराते हैं।