ग्वालियर. व्यापमं फर्जीवाड़े को लेकर सरकार कितनी संजीदा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्री-पीजी फर्जीवाड़े में आरोपी महिला डॉक्टर रश्मी सिंह परिहार को गजराराजा मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक पद के लिए चुन लिया गया है। आपको बता दें कि यह वही डॉ. रश्मी सिंह परिहार हैं जिनके खिलाफ एसआईटी ने प्री-पीजी में फर्जी तरीके से एडमिशन लेने के मामले में दो माह पहले एफआईआर दर्ज की है।
डॉ.परिहार इस मामले में फरार चल रही हैं। जीआरएमसी के लिए चयनित सहायक प्राध्यापकों की सूची संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी हुई है। इसमें डॉ. रश्मी का नाम 5वें नंबर पर है।
इसलिए हुई चूक सहायक प्राध्यापक के इंटरव्यू भोपाल में हुए। इसके लिए बनाई गई चयन समिति में जीआरएमसी के किसी डॉक्टर या अधिकारी को शामिल नहीं किया गया था। इसमें डीएमई, डिप्टी सेक्रेटरी चिकित्सा शिक्षा, सागर के डीन और भोपाल व जबलपुर के दो एक्सपर्ट थे। ऐसे में चयन समिति को यह पता ही नहीं था कि वे जिसका चयन कर रहे हैं वो प्रीपीजी फर्जीवाड़े की आरोपी है। समिति में यदि जीआरएमसी के डीन या प्रोफेसर होते तो इस तरह की चूक नहीं होती।
सन् 2013 में 630 सीटों में से 316 की बुकिंग करा डॉ. सागर ने कमाए थे सवा करोड़ रुपए
ग्वालियर| पीएमटी फर्जीवाड़े के सरगना डॉ. जगदीश सागर ने 17 वर्ष में स्वयं को व्यापमं के समानांतर खड़ा कर लिया था। वर्ष 2013 में डॉ. सागर ने व्यापमं की कुल 630 सीटों में से 316 सीटों की बुकिंग कर सवा करोड़ रुपए एडवांस में लिए थे।
वर्ष 1999 में उसने ग्वालियर के कुछ डॉक्टरों के परिजन को भी सलेक्ट कराया था। वर्ष 1999 से 2004 तक उसकी पत्नी के जिला पंचायत सदस्य बनने पर वह राजनीति में सक्रिय रहा। इस दौरान उसने किसी का सेलेक्शन नहीं कराया। लेकिन पत्नी के चुनाव हारने के बाद वह फिर से पीएमटी फर्जीवाड़े से जुड़ गया। डॉ. सागर ने कुछ डॉक्टरों के नाम भी बताए हैं जिनके परिजन के सेलेक्शन उसने वर्ष 1999 में कराए थे।
एफआईआर में है डॉ.रश्मी का नाम
जीआरएमसी के 2011 बैच की छात्रा डा.रश्मी सिंह परिहार के खिलाफ 16 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में वह अब तक फरार है।
-वीरेंद्र जैन, एएसपी व प्रभारी एसआईटी
चयन हुआ है, नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया
सहायक प्राध्यापकों का अभी सिर्फ चयन हुआ है । उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है। नियुक्ति पत्र पुलिस वेरीफिकेशन कराने और उनकी ओर से एनओसी मिलने के बाद ही जारी किया जाएगा।
-डॉ. एसएस कुशवाह, संचालक चिकित्सा शिक्षा, मप्र
क्लीनचिट मिलने तक ज्वाइन नहीं करेंगी
यह बात सही है कि मेरी पत्नी का चयन सहायक प्राध्यापक के लिए हो गया है। ,लेकिन इसमें कई तरह की बाधाएं हैं। पुलिस ने मेरी पत्नी को गलत तरीके से फंसा दिया है। जब तक क्लीनचिट नहीं मिलेगी ज्वाइन नहीं कराएंगे।
-डॉ. विक्रम सिंह परिहार, डॉ. रश्मी परिहार के पति