ग्वालियर. गुलशन सही मायने में गुदड़ी का लाल है। घर खर्च व भाई-बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारी के साथ वह बीई (सिविल) की पढ़ाई भी कर रहा है। वह हर दिन सुबह तीन बजे उठता है और अखबारों का बंडल साइकिल पर लादकर बांटने निकल पड़ता है। इससे उसे दस हजार रुपए प्रतिमाह तक की आय हो जाती है। जब वह दसवीं में था, उसके पिता बीमारी के कारण असहाय हो गए। गुलशन ने हिम्मत नहीं हारी और पार्ट टाइम ट्यूशन व अखबार बांटने का काम शुरू कर दिया।
हर सुबह घर-घर अखबार पहुंचाकर लोगों को दुनिया भर की खबरों से अपडेट रखने वाला गुलशन इससे मिलने वाली रकम से जहां खुद इंजीनियरिंग कर रहा है, वहीं अपने भाई-बहन को भी पढ़ा रहा है। पिता की बीमारी के कारण घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद गुलशन ने हिम्मत नहीं हारी। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक हॉकर से हो गई। उसने हॉकर से पेपर बांटने की बात की और काम शुरू कर दिया। अब वह प्रतिदिन तीन सौ घरों में पेपर बांट रहा है।
दस हजार रुपए महीने तक कमाई
सुरैया पुरा मुरार निवासी गुलशन को पहले महीने में 500 रुपए मिले थे। धीरे-धीरे गुलशन ने अखबारों की संख्या बढ़ाई और वह दस हजार रुपए महीने तक कमा लेता है।
सुबह तीन बजे शुरू हो जाता है सफर
शहर के एक निजी कॉलेज से सिविल में बीई कर रहे गुलशन हर रोज सुबह तीन बजे थाटीपुर स्थित सर्कुलेशन सेंटर पहुंचता है। वहां से पेपर कलेक्ट कर सुबह नौ बजे तक हुरावली के 300 घरों में अखबार पहुंचा देता है। दोपहर में कॉलेज चला जाता है।
बहुत स्वाभिमानी है गुलशन
जब घर की आर्थिक स्थिति खराब हुई, तब गुलशन 10वीं में पढ़ रहा था, लेकिन उसने घर चलाने के लिए अखबार बांटना शुरू कर दिया। वह बहुत ही स्वाभिमानी है, कभी किसी के आगे हाथ फैलाना उसे मंजूर नहीं है। सुषमा कुशवाह, गुलशन की मां
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