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शिंदे की छावनी सी पहल मुरार में हो तो सुधरें हालात, ट्रैफिक पकड़ेगा रफ्तार

6 वर्ष पहले
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ग्वालियर. शिंदे की छावनी में सड़क तो चौड़ी थी, लेकिन हाथ ठेले वालों की वजह से यहां ट्रैफिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा था। दैनिक भास्कर ने अभियान समाधान मिलजुलकर शुरू किया। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने पहल की तो इसका असर भी दिखने लगा। निगम ने लक्ष्मण तलैया पर हॉकर्स जोन को व्यवस्थित करवाया और ठेले वालों को दस दिन का समय दे दिया।
इतना काम होने के बाद ठेलेवाले हॉकर्स जोन में जाने की तैयारी कर रहे हैं और अभी जिस तरह से ठेले लगाए जा रहे हैं उससे सड़क नहीं घिर रही है, इससे इस रोड की ट्रैफिक ने रफ्तार पकड़ ली है। ठीक ऐसी ही समस्या मुरार के सदर बाजार की है यहां पर भी ठेले सड़क घेरते हैं और हॉकर्स जोन खाली रहता है। जैसा काम शिंदे की छावनी में किया गया है वैसी इच्छाशक्ति अगर पुलिस और नगर निगम सदर बाजार में भी दिखाए तो यहां भी ट्रैफिक रफ्तार पकड़ लेगा।

लश्कर इलाके में ट्रैफिक के लिहाज से शिंदे की छावनी सबसे ज्यादा व्यस्ततम इलाका माना जाता था और यहां का ट्रैफिक सबसे ज्यादा अस्तव्यस्त हो जाता था। सुबह 10 से 12 बजे और शाम को 5 से 8 बजे तक शिंदे की छावनी रोड से निकलना मुश्किल हो जाता था। ठीक ऐसे ही हालात मुरार के सदर बाजार में दिन भर रहते हैं।
कई बार हटवाए फिर भी सड़क से नहीं हटे ठेले
मुरार के सदर बाजार का स्वरूप ठेलों ने बिगाड़ दिया है। यहां के ठेलों को विस्थापित कर हॉकर्स जोन में पहुंचाने की कोशिश भी हुई लेकिन हॉकर्स जोन खाली है और ठेले सड़क घेरकर खड़े होते हैं। छह महीने में पुलिस और निगम के अफसर अतिक्रमण करने वालों के साथ तीन बार बैठकर बाजार व्यवस्थित करने की योजना बना चुके हैं। कुछ दिन व्यवस्थित रहने के बाद अव्यवस्था फैल जाती है।

सड़क के दोनों ओर लगते हैं 60 ठेले
सदर बाजार में सड़क के दोनों ओर 60 ठेले लगे हैं। ठेले और ग्राहकों की वजह से सड़क पर चलने वालों के लिए मात्र 10 से 15 फीट जगह बचती है। चार पहिया वाहन आ जाएं ताे यहां पर ट्रैफिक जाम तय है।
ये सुधार हुए शिंदे की छावनी में: {पुलिस ने एक सप्ताह पहले अभियान चलाकर सड़क किनारे लगने वाले ठेलों को हटवा दिया था। ठेले वालों ने आंदोलन किया। बाद में लक्ष्मण तलैया के हॉकर जोन में व्यवस्थित करने की मांग की। {निगम ने 10 दिन का समय ठेले वालों को दिया और हॉकर जोन को व्यवस्थित करने का काम शुरू कर दिया। {अब ठेले फुटपाथ के किनारे लगने लगे हैं।