ग्वालियर. शहर में ऑटो ड्राइवरों के बीच लुटेरों का गिरोह सक्रिय है। जो खासकर रात्रि में ऑटो में बैठने वाली सवारियों को अपना शिकार बना रहा है। गुरुवार की रात लहार के वकील राजेश श्रीवास्तव इसी तरह के गिरोह के शिकार हुए।
दीनदयाल नगर से ऑटो में बैठे श्रीवास्तव को ऑटो चालक ने पहले तो पिंटो पार्क की गलियों में घुमाया, जब उन्होंने विरोध किया तो कोई केमिकल सुंघाकर बेहोश कर दिया।
शुक्रवार को उन्हें जब होश आया तो उनका
मोबाइल फोन, पर्स, छह सौ रुपए और घड़ी गायब थी। महाराजपुरा थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उनके लौटने के बाद महाराजपुरा टीआई जनवेद सिंह का कहना है कि जो कहानी सामने आई है वह संदिग्ध है। उनके बताए तथ्यों की तस्दीक कराई जा रही है।
‘भगवान का शुक्र है, मेरी जान बच गई’
आप तो यह मान लो कि मेरी जान बच गई, ऑटो ड्राइवर और उसके साथी ने तो मुझे बेहोश कर लूटा, पीटा और झांसी रेलवे स्टेशन से दो किमी पहले कीचड़ में पटककर भाग गए। मैं लगभग 12 घंटे बाद होश में आया तो खुद को कीचड़ में पाया। पैरों से खून निकल रहा था और हाथ-पैरों में भी दर्द था। ऐसा लगा जैसे मेरे प्राण निकलने के बाद वापस लौटे हैं।
बदमाश मेरा पर्स, मोबाइल फोन, घड़ी, छाता और छह सौ रुपए लूटकर भाग निकले। गुरुवार काे मैं अपनी बहन से मिलने दीनदयाल नगर गया था। रात लगभग दस बजे भांनजे बीडी श्रीवास्तव महाराजा कॉम्पलेक्स के पास छोड़ गए थे। वहां से मैं चार नंबर रूट के टेंपो में बैठा ।
पिंटो पार्क तिराहे पर पहुंचकर टेंपो ड्राइवर ने कहा कि और सवारी नहीं हैं इसलिए वे यहां से ऑटो पकड़ लें। मैं तिराहे पर खड़े एक ऑटो में बस स्टैंड तिराहे के लिए बैठ गया। 15 मिनट तक ड्राइवर यहीं खड़ा सवारी का इंतजार करता रहा। इसके बाद ऑटो को गलियों में ले गया। मैंने विरोध किया तो बोला अभी रास्ते पर आ जाएंगे।
इसके बाद उसने मोबाइल फोन से कॉल कर अपने एक साथी को बुला लिया। मैंने विरोध किया तो मेरे बगल में बैठे उसके साथी ने मुंह पर रुमाल लगा दिया, इसके बाद मुझे पता नहीं चला क्या हुआ। शुक्रवार दोपहर मुझे जब होश आया तो मैं झांसी में कीचड़ में पड़ा था।
जरा सी सावधानी से रुक सकती हैं वारदात
> पुलिस ऑटो ड्राइवरों के खिलाफ वारदात के बाद कार्रवाई करती है जो कुछ दिन बाद ही बंद हो जाती है।
> रात में पुलिस ऑटो स्टैंड की चेकिंग करे तो वारदात रुक सकतीं हैं। स्टेशन पर भी प्री-पेड बूथ व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।
> रात को ऑटो में बैठते समय उसका नंबर नोट करें। परिजन को फोन करके बता दें।