(गलत जन्मतिथि वाली अंकसूची दिखाता परमानंद)
फोटो संजय भटनागर
ग्वालियर। मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की गलती से एक युवक 114 वर्ष का बुजुर्ग बन गया। यह गलती हाईस्कूल की अंकसूची में हुई है, जिसमें युवक की जन्मतिथि 1 जनवरी 1900 कर दी गई, जबकि उसका जन्म 13 मार्च 1978 में हुआ था। इस गलती को आज तक शिक्षा मंडल ने सही नहीं किया, जिसके कारण परमानंद नाम के इस युवक हर विभाग में सरकारी नौकरी के लिए रिजेक्ट कर दिया गया। अंत में मंगलवार को निराश होकर वह ग्वालियर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंच गया और इच्छा मृत्यु का आवेदन दे दिया। बाद में कलेक्टर ने तुरंत उचित कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।
परमानंद रजक ने 1996 में भितरवार के सरकारी स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। परीक्षा के बाद उसे जो अंकसूची मिली, तो उसके पैरो तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उसमें उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1900 अंकित हो गई थी। उसने जन्मतिथि सुधार के लिए शिक्षा मंडल से पत्र व्यवहार किया और कई बार भोपाल के चक्कर भी लगाए, लेकिन उसे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। परमानंद बताता है कि इस गलती के कारण उसे किसी कालेज में प्रवेश नहीं मिला। उसने 2005 एयरफोर्स की नौकरी भी ज्वाइन की, लेकिन अंकसूची में गलती होने का कारण उसे छह महीने बाद नौकरी से यह कहकर निकाल दिया कि उसकी अंकसूची फर्जी है।
अंत में थकहार परमानंद मंगलवार को कलेक्टर पी.नरहरि की जनसुनवाई में पहुंच गया और इच्छा मृत्यु का आवेदन दे दिया। यह आवेदन देखकर कलेक्टर सकते में आ गए और उन्होंने युवक का समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि वे इस मामले में ठोस कार्रवाई करेंगे।
उधर परमानंद अपनी जिंदगी से निराश होकर कहता है कि वह मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री औऱ राष्ट्रपति तक गुहार लगा चुका है, लेकिन किसी प्रकार का समाधान नहीं मिला। इसलिए वह जीवन से निराश होकर मरना चाहता है और कलेक्टर के पास इच्छा-मृत्यु का आवेदन लेकर आया है।
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