शिवपुरी। शिवपुरी से मोहना के बीच ट्रेनों की क्रॉसिंग के लिए बनाए गए एकमात्र पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन पर एक बार फिर डकैतों की काली छाया पड़ गई। शनिवार को दिनदहाड़े रेलवे ट्रैक पर टेलीकॉम कम्युनिकेशन का काम कर रही आईटीआई लिमिटेड कंपनी बेंगलुरु के इंजीनियर व लेबर का अपहरण हो गया। वारदात से घबराए कंपनी के कर्मचारियों ने वापसी के लिए बोरिया बिस्तर बांध लिया है।
ऐसे में यदि कंपनी ने काम छोड़ दिया तो फिर स्टेशन बिल्डिंग बनने के बाद भी ट्रेनों का स्टॉपेज व क्रॉसिंग शुरू नहीं हो पाएगी। क्रॉसिंग के लिए एक से डेढ़ घंटे तक स्टेशन पर होने वाला यात्रियों का इंतजार भी फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।
फोन स्विच ऑफ मिला तो चिंता हुई, मौके पर पहुंचे तो गैंती फावड़े पड़े मिले
आईटीआई कंपनी के प्रोजेक्ट प्रभारी जगदीश ने बताया कि शनिवार की सुबह कंपनी इंजीनियर जयपाल पुत्र थॉमस खलखो अपने साथ लेबर को लेकर ट्रेन से पाड़रखेड़ा पहुंचे। इसके बाद जयपाल अपने साथ लेबर तुलसी आदिवासी को साथ लेकर रवाना हुए। जयपाल व तुलसी रेलवे के किलोमीटर 1221 नंबर पर काम कर रहे थे। दोपहर लगभग 12.30 बजे जगदीश ने जब जयपाल को
मोबाइल लगाया तो स्विच ऑफ मिला।
इसके बाद वे अपनी टीम के साथ उस जगह पहुंचे, जहां जयपाल काम कर रहा था। वहां गेंती-फाबड़े यूं ही पड़े मिले, काम भी अधूरा ही छूटा हुआ था। आसपास तलाश करने के बाद भी जब दोनों का पता नहीं चला तो फिर गोपालपुर थाना पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद से पुलिस की टीमें क्षेत्र के जंगल में सर्चिंग कर रही हैं।
गुना से ग्वालियर का मिला है कंपनी को काम
आईटीआई लिमिटेड कंपनी का रीजनल ऑफिस भोपाल में हैं, जबकि सब-ऑफिस दिल्ली तथा हेडऑफिस बेंगलुरु में है। प्रोजेक्ट प्रभारी जगदीश का दावा है कि बड़े-बड़े टेलीकॉम कम्युनिकेशन के काम हमारी कंपनी को ही मिलते हैं। गुना से ग्वालियर तक का काम कंपनी जनवरी 2010 से कर रही है। पूर्व में कंपनी ने जिस कॉन्ट्रेक्टर को काम दिया, वो छोड़कर चला गया। इसलिए कंपनी की ओर से जयपाल व जगदीश की टीम को जनवरी 2014 से काम करने के लिए भेजा।
पाड़रखेड़ा पर डकैतों की छाया
> लगभग 10 वर्ष पूर्व पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन के पास जमुनिया के जंगल से रामबाबू-दयाराम गड़रिया गिरोह ने दिनदहाड़े रेलवे इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह परमार सहित गैंगमैन का अपहरण कर लिया था।
> उस घटना के बाद से ही पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया गया।
> जिले में सूचीबद्ध डकैत गिरोह खत्म हो गए तो फिर पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन का जीर्णोद्धार शुरू किया गया।
> इस घटना से एक बार फिर रेलवे स्टेशन के शुरू होने की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।
> अभी तो टेलीकॉम कम्युनिकेशन कंपनी ने काम बंद किया, कहीं बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन ठेकेदार ने वापसी की तो फिर स्टेशन कब शुरू होगा, कुछ नहीं कहा जा सकता।
इसलिए महत्वपूर्ण है पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन
> शिवपुरी से मोहना के बीच कोई क्रॉसिंग स्टेशन न होने की वजह से अभी यात्रियों को एक से डेढ़ घंटे तक स्टेशन पर ट्रेनों की क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है।
> एक साल पूर्व स्टेशन का काम शुरू किया गया। लेकिन अब फिर डकैतों की काली छाया ने स्टेशन पर चल रहे काम को रुकवा दिया।
> स्टेशन से ट्रेन छोड़ने की सूचना देने एवं सिग्नल टेलीकॉम कम्युनिकेशन के बिना नहीं हो सकते। चूंकि पाड़रखेड़ा तो क्रॉसिंग स्टेशन बन रहा है, इसलिए वहां तो टेलीकॉम लिंक महत्वपूर्ण है। यदि कम्युनिकेशन का काम नहीं हुआ तो फिर स्टेशन की बिल्डिंग बनने के बाद भी उसे शुरू नहीं किया जा सकेगा।
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