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व्यापमं कर्मचारी का खुलासा: 'बॉस के पैर छू-छूकर मैं भी रैकेट में शामिल हो गया'

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. व्यावसायिक परीक्षा मंडल में शायद ही कोई एेसा अफसर या कर्मचारी हो जिसे फर्जीवाड़े की जानकारी न हो या इसमें शामिल न रहा हो। फर्जीवाड़े के रैकेट में शामिल कुछ अफसर जेल में बंद हैं और कुछ अफसर और कर्मचारी अभी खुले घूम रहे हैं। मैंने फर्जीवाड़े में लोगों को रुपए कमाते देखा तो अपने बॉस के पैर छू-छूकर भरोसा जीता और रैकेट में शामिल होकर मैं भी रुपया कमाने लगा।
यह खुलासा पुलिस की गिरफ्त में आए व्यापमं के संविदा कर्मचारी बृजमोहन जाटव ने किया है। पुलिस के सामने इसने जिन नामों का खुलासा किया है उसके बारे में तस्दीक करने के साथ ही इनकी तलाश भी शुरू कर दी गई है। प्री-पीजी फर्जीवाड़े में पकड़े गए गौरव भदौरिया, अतुल और अमित शर्मा ने खुलासा किया था कि व्यापमं के संविदा कर्मचारी बृजमोहन जाटव के जरिए वह फर्जीवाड़ा करते थे। शुक्रवार रात को बृजमोहन पुलिस के हाथ आ गया। बृजमोहन ने बताया कि व्यापमं में फर्जीवाड़ा 20 साल से ज्यादा पुराना है। इसमें कुछ अफसर और कर्मचारी शामिल थे तो कुछ को पूरे फर्जीवाड़े के बारे में जानकारी थी फिर भी चुप थे।
बृजमोहन ने बताया कि उसके बॉस सीके मिश्रा थे, वे इस रैकेट से जुड़े थे। उसे लगा कि इनका भरोसा जीतकर वह भी रुपया कमा सकता है। इसके बाद रोज इनके पैर छूता था। 2007 में वह एक काम लेकर आया, लेकिन यह काम नहीं हुआ। फिर भरोसा जीतने के प्रयास में लग गया। 2008 में इसका एक काम हुआ, 2009 में दो। इसके बाद वह जो भी काम लाता, वह होता गया। बृजमोहन ने बताया कि श्री मिश्रा, अजय सेन व नितिन महेंद्रा से जुड़े थे। इनका आगे भी लिंक था लेकिन वह क्या था, यह जानकारी नहीं है।

डॉ. सागर के डॉक्टर रिश्तेदारों की तलाश: आरोपी डॉ. जगदीश सागर के उन रिश्तेदारों की पुलिस को तलाश है जो पीएमटी में सिलेक्ट होने के बाद डॉक्टर बन गए हैं।
डाॅ. सागर को भोपाल जेल भेजा, विंध्यवासनी रिमांड पर
पीएमटी फर्जीवाड़े के सरगना डाॅ. जगदीश सागर को जेएमएफसी महेश कुमार झा की कोर्ट ने शुक्रवार को भोपाल जेल भेजने के निर्देश दिए। वहीं आरोपी विंध्यवासनी को मुरार पुलिस ने एक अन्य मामले में 28 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर लिया है। एसआईटी ने दोनों को कोर्ट में पेश किया था। एडीपीओ रितेश गोयल ने तर्क रखा कि अभी विवेचना जारी है, इसलिए उक्त आरोपियों को जेल भेजा जाए। वहीं आरोपी विंध्यवासनी से मुरार पुलिस को एक अन्य मामले में पूछताछ करनी है। इसलिए उसे पुलिस रिमांड पर दिया जाए।